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फिल्मों में ऐसा कुछ न हो जिससे युवाओं पर पड़े बुरा प्रभाव : गिल

3 वर्ष पहले
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पंजाबी फिल्म अदाकार गुगू गिल ने कहा कि फिल्मों व गीतों में ऐसा कुछ भी नहीं होना चाहिए, जिसका नौजवान पीढ़ी व समाज पर बुरा प्रभाव पड़े। इस मामले में सैंसर बोर्ड को भी मजबूत होना चाहिए। गुगू गिल्ल सोफीया इंस्टीट्यूट उद्घाटन समागम में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि पंजाबी फिल्मों में 3 दशक पहले व आज के समय में काफी अंतर है। उस समय पंजाब फिल्में काफी कम बजट में बनती थी व काम भी काफी कम था। आज के समय में पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री आसमान छू रही है। अब ऐसा कोई कलाकार नहीं जिसके पास काम कम हो। उन्होंने कहा कि पंजाबी फिल्में किसी भी पक्ष में अब हिन्दी फिल्मों से कम नहीं हैं, सिर्फ भाषा का ही फर्क है। इसका सबूत यह है कि हिंदी फिल्मों के अदाकार व डायरेक्टर पंजाबी फिल्मों में काम की मांग कर रहे हैं। फिल्म इंडस्ट्री में पंजाबी फिल्में हिंदी फिल्मों का मुकाबला कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वह 6 पंजाबी फिल्में कर रहे हैं, जोकि इस साल में ही रिलीज होंगी। फिल्म स्टार होने के बाद भी अपना गांव न छोडऩे वाले गुगू गिल ने कहा कि गांव मेरी कमजोरी है। सफल होने के बाद हर व्यक्ति सबसे बेहतरीन जगह पर रहना पसंद करता है। उनके लिए सबसे बेहतर जगह उनका गांव माहनी खेड़ा है। जहां अपनों के साथ सफलता की खुशी मनाने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि फिल्म में काम करने के लिए मुम्बई भी जाना पड़ता था। परंतु गांव से प्यार कभी भी नहीं छोड़ा व न ही जिंदगी में कभी छोड़ा जा सकता है। इस मौके पर पूर्व विधायक बाबू प्रकाश चंद गर्ग, विनरजीत गोल्डी, अमित अलीशेर आदि उपस्थित थे।

संगरूर में पत्रकारों से बातचीत करते पंजाबी अदाकार गुगू गिल्ल।

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