जैन स्थानक मैग्जीन मोहल्ला में धार्मिक समागम करवाया गया। धार्मिक समागम को संबोधित करते हुए पंडित र| श्री विनय चंद्र महाराज के सुशिष्य सेवाभावी परनीत मुनि महाराज ने कहा कि आज हम तथ्यों को जानने के बिना अंध विश्वास में घिरते जा रहे हैं। हमें उसकी जानकारी न होते हुए भी उस चीज पर विश्वास कर लेते है।
हम अंध विश्वास के कारण भेडों की तरह दूसरों के पीछे पीछे भाग रहे है। जबकि हमें गुण दोष देखे बिना भीड़ तंत्र के पीछे नहीं भागना चाहिए। जो व्यक्ति सही चीज को समझ कर उस पर विश्वास करते हैं, उसे समयक कहते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक बार किसी व्यक्ति ने शक्कर की दो बोरी चुरा ली। चोर को पकड़ने के लिए सभी घरों की तलाशी ली गई। पकड़े जाने के डर से चोर ने गांव के कुएं में शक्कर पलट दी। अगले दिन लोगों ने जब कुएं से पानी निकाल कर पिया तो पानी बहुत मीठा था। अंध विश्वास के कारण लोगों ने उस कुएं को चमत्कार मान कर उसकी पूजा करनी शुरू कर दी। परंतु जिस व्यक्ति ने कुएं में शक्कर डाली थी। वह कुएं की पूजा नहीं करता था। क्योंकि उसको सच्चाई मालूम थी। गांव निवासियों ने कुएं के पानी को अमृत रूपी चरणामत की तरह थोड़ा थोड़ा निकालना शुरू कर दिया। कुछ समय बाद चोर ने अपने दोस्त को पानी मीठा होने का कारण बताया। दोस्त ने भी कुएं की पूजा करनी छोड़ा। उसने आकर अपने दोस्त को बताया।
धीरे धीरे सब लोगों को यह बात पता चल गई कि यह कोई चमत्कार नहीं है। यहां तो चोरी की गई शक्कर से पानी मीठा हुआ है। सभी गांव वालों ने कुएं की पूजा करनी छोड़ दी। इसलिए कहने का तात्पर्य यह है कि आज हम किसी को जाने बिना ही भेड़ों की तरह एक दूसरे के पीछे भाग रहे है। जो हमें गिरावट की ओर धकेल रहा है। हमें इन बातों से ऊपर उठ कर सोच विचार कर आगे बढ़ना चाहिए। जिस व्यक्ति में दोष कम और गुण ज्यादा होते है । वह व्यक्ति मित्थयात्व के अंतर्गत नहीं आता। यदि हमने संसार को छोड़ा है तो हमारा लक्ष्य भी ऊंचा होना चाहिए। तभी हम मोक्ष प्राप्त कर सकते है।
संगरूर में प्रवचन सुनते श्रद्घालु।