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कॉलेजों में दलित छात्रों के फीस भरने के फरमान से युवाओं में रोष

3 वर्ष पहले
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पंजाब रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन की ओर से पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशीप स्कीम में संशोधन के फैसले के संबंध में बैठक का आयोजन किया गया।

इसमें यूनियन के प्रधान रशपिंदर जिमी ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशीप स्कीम के तहत दलित विद्यार्थियों को जो सुविधाएं दी जाती थी सरकार उसे बंद करना चाहती है। पहले स्कीम के तहत विद्यार्थी को फीस नहीं भरनी पड़ती थी व पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशीप का ऑनलाइन फार्म भरना पड़ता था। जिन विद्यार्थियों को ऑन लाईन फोरम नहीं भरने आते थे, उनसे पूरी फीस भरने के लिए कहा जाता था। जिस कारण वह पढ़ाई छोड़ देते थे। केन्द्र सरकार की ओर से पिछले तीन वर्षों की स्कॉलरशिप की अदायगी नहीं की गई। जिसके तहत निजी कॉलेज व सरकारी कॉलेज विद्यार्थियों को पूरी फीस भरने के लिए कह रहे है।

केन्द्र सरकार का यह फैसला छात्र विरोधी है। पहले विद्यार्थी वजीफे के कारण पढ़ लेते थे, परंतु अब उनसे यह हक भी छीन लिए गए है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि फैसला वापस न लिया गया तो पीआरएसयू के सदस्य संघर्ष करेंगे। (रजत गोयल)

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