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मनुष्य को मान सम्मान बढ़पन के कारण नहीं बल्कि भय के कारण मिल रहा : परणीत मुनि

3 वर्ष पहले
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जैन स्थानक मोहल्ला मैग्जीन में धार्मिक समागम करवाया गया। समागम को संबोधित करते हुए विनय मुनि महाराज के सुशिष्य परणीत मुनि महाराज ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी द्वारा बताए गए तीन सूत्र ऐसे है जो अपनों को बेगाना व बेगानों को अपना बना देते हैं। उन्होंने तीन सूत्रों में से आग्रह वृति सूत्र पर चर्चा करते हुए कहा कि आग्रह वृति आने से मनुष्य अपने अधिकारों से बहुत जल्दी वंचित हो जाता है। आग्रह वृति अपनों को बेगाना बना देती है। हमें आग्रह वृति को कमजोर करना होगा। आज मनुष्य को मान सम्मान बढ़पन के कारण नहीं बल्कि भय के कारण मिल रहा है। इसी कारण हम वंश, घर, परिवार समाज में सब कुछ होते हुए भी सब कुछ अनदेखा कर रहे है। सबसे पहले हमें अपने अंदर से अपनी मैं को खत्म निकालना होगा। जब तक हम बीमारी का कारण नहीं ं ढूंढेंगे तब तक उस बीमारी का इलाज नही कर सकेंगे। कारण पता चलने पर हमें उस बीमारी का इलाज करना होगा। समूह में रहने के लिए कुछ प्राथमिकताएं होती है। जिसके पालन करने से हम घर परिवार व समाज को सही ढंग से चला सकते है। उन्होंने कहा कि आग्रह में अपना ही स्वार्थ है। इसलिए उसे छोड़ देना चाहिए। आग्रह में विकास नहीं विनाश होता है। यही मिथयातव का कारण है। इस मौके पर तपस्वी र| सुधीर मुुनि महाराज ने कहा कि दान, शील, तप, संयम ये चार चीजें हमें आगे बढ़ाती है। हमें अपनी दौड़ के साथ साथ दृष्टि को भी आगे बढ़ाना होगा। जो मनुष्य महत्वाकांक्षाओं को छोड़ देता है। उसे शांति समाधि मिल जाती है। गुरु कृपा के हर कार्य में सफलता मिलती है। आगे बढ़ेंगे तो जीवन का उधार भी होगा।

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