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यूरिया व दवाओं ने बिगाड़ी जमीन; जिंक 30 व आयरन 70% तक कम, इसमें पैदा अनाज-सब्जियां खून की कमी व कैंसर का कारण

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

जिले में खेतों की सेहत बिगड़ रही है। यहां की जमीन में 30 से 40 प्रतिशत जिंक और 70 प्रतिशत तक आयरन की कमी सामने आ रही है। यह हमारे जीवन को प्रभावित करने वाली रिपोर्ट है। क्योंकि ऐसी जमीनों से उत्पादित दलहन, खाद्यान्न या सब्जियों आदि से हमारे शरीर में भी आयरन व जिंक की कमी हो जाती है। जो कि पाचन तंत्र में गड़बड़ी, नपुसंकता और शरीर में खून की कमी का कारण है। उपजाऊ जमीनों में आवश्यक तत्वों का संतुलन गड़बड़ाने का एक मुख्य कारण यूरिया, डीएपी खाद व पेस्टीसाइड दवाइयों का अंधाधुंध उपयोग है। इन रसायनों का अधिक प्रयोग कैंसर का भी कारण माना जाता है।

केंद्र सरकार ने दो साल पहले मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की थी। जिसमें खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जा रहा है। इन्हीं नमूनों की जांच की अब तक की रिपोर्ट में यह चिंताजनक खुलासा हुआ है। मिट्टी में कम से कम 4.5 पीपीएम होनी चाहिए, जो नहीं है। जिंक की भी कमी पाई जा रही है। कृषि अधिकारी इसका मुख्य कारण किसानों द्वारा फसलों में डीएपी व यूरिया खाद के साथ पेस्टीसाइड दवाइयों के अत्यधिक उपयोग को मानते हैं। जैविक खाद का उपयोग कम हो रहा है। जिले में ढाई लाख से अधिक किसान खेती कर रहे हैं। जिले में दोनों फेज में दो लाख 40 हजार 341 किसानों को सोइल हेल्थ कार्ड दिए जा चुके हैं। अब तक 69,692 किसानों के खेतों से सैंपल लिए हैं।

रासायनिक खाद व दवा के अधिक उपयोग का बठिंडा में यह असर

लैब में मिट्‌टी की जांच करते ।

एक्सपर्ट व्यू

जिस तरह खून में हिमोग्लोबिन निर्धारित मात्रा तक होना जरूरी है। इसी तरह उपजाऊ मिट्टी में भी आयरन व जिंक जैसे तत्व जरूरी मात्रा में होने चाहिए। हम जो भी चीज खाते हैं, उसमें शामिल तत्व ही हमारी जरूरत पूरी करते हैं। शरीर में आयरन की कमी से खून की कमी हो जाती है। जिंक की कमी से बाल झड़ने, नपुसंकता, पाचन तंत्र में गड़बड़ी होती है। कैंसर का कारण जिंक या आयरन की कमी तो नहीं कहा जा सकता पर अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग इसे भी बढ़ावा दे सकता है। डाॅ. अनीश जैन, फिजिशियन सांवलियाजी जिला सामान्य चिकित्सालय

जिले में कृषि योग्य मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट बहुत चिंताजनक है। वर्ष 2016-17 में जिंक व आयरन में करीब 30 से 33 प्रतिशत तक कमी मिली। इसके बाद लिए जा रहे नमूनों में तो 70 प्रतिशत तक भी आयरन की कमी आ रही है। रासायनिक खाद का अत्यधिक प्रयोग कैंसर का खतरा भी बन जाता है। किसानों को इस बारे में सोचना होगा। जैविक खाद का प्रयोग बढ़ाएं और फसल बुआई से पहले मिट्टी की जांच जरूर करवाएं। सरदारसिंह कोठारी, कृषि अनुसंधान अधिकारी मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला

कृषि विभाग के ये प्रयास

अभी एक माह खेत खाली, इसलिए विशेष अभियान... कृषि आयुक्त विकास सीताराम पाले ने सोमवार को कृषि अधिकारियों के साथ वीसी में कहा कि अभी खेत खाली पड़े हैं। हर खेत में जाकर मिट्टी परीक्षण के लिए नमूना लें। इसके लिए 15 मई से 15 जून तक विशेष अभियान चलेगा।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड से जानकारी आने के बाद सरकार ने खेतों में सूक्ष्म पोषक तत्वों के लिए 90 प्रतिशत तक अनुदान की योजना भी शुरू कर दी है, ताकि किसान मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढा सके। शंकरलाल जाट, सहायक निदेशक कृषि

सरकार सोइल कार्ड इसीलिए बना रही है कि मिट्टी में जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग नहीं हो रहा है और न किसान इस बारे में जागरूक है। कार्ड में फसलवार पूरी जानकारी दी जा रही है कि किस बुवाई के लिए क्या करें। रासायनिक खाद के अंधाधुंध उपयोग से जमीन का हास हो रहा है। रमेशचंद्र चाष्टा, सहायक कृषि अधिकारी

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार खेती की जमीन में आवश्यक तत्वों का संतुलन नहीं होने का सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसका ज्वलंत उदाहरण कृषि क्षेत्र में प्रगतिशील पंजाब का बठिंडा जिला है। जहां उन्नत किसान तो खूब हैं पर उनके द्वारा डीएपी का अंधाधुंध उपयोग किया गया, जिसका असर सीधा लोगों की सेहत पर पड़ा। ऐसे में बठिंडा से बीकानेर तक चलने वाली ट्रेन में बड़ी संख्या में कैंसर पीड़ित यात्रियों का मिलना इसके दुष्प्रभाव का ज्वलंत उदाहरण है। इस ट्रेन को लोग कैंसर ट्रेन ही कहने लगे हैं।

वर्ष 2016-17 में मिट्टी परीक्षण का परिणाम

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना में लिए मिट्टी के नमूनों की जांच में खुलासा

ऑर्गेनिक कार्बन

16209 कुल सैंपल

9465 में थोड़ी कमी

5857 में बहुत ज्यादा कमी

887 में पर्याप्त मात्रा

जिंक

16209 कुल सैंपल

11151 में पर्याप्त मात्रा

5058 में मिली कमी

आयरन

16209 कुल सैंपल

10263 में पर्याप्त मिला

5946 में कमी

परिणाम: जमीन की उपजाऊ व जल संचय क्षमता कमजोर

हर किसान का मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधार से लिंक... मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना से पहले तक हर खेत से मिट्टी का नमूना नहीं लिया जाता था। किसी पंस क्षेत्र में एक दो सैंपल लेकर परीक्षण कर लिया जाता था। इस योजना के बाद प्रत्येक किसान के मृदा स्वास्थ्य कार्ड अनिवार्य कर दिया गया। उसे किसान के आधार कार्ड, मोबाइल नंबर से जोड़ा गया। ताकि उसके यहां से सैंपल लेते ही लोकेशन भी आ जाएगी। अब प्रतिदिन औसत 50 सैंपल लिए जा रहे हैं। कोई किसान खुद अपनी मर्जी से मिट्टी की जांच कराना चाहे तो भी पांच रुपए की रसीद कटा कर सात दिन में रिपोर्ट ले सकेगा।

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