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सरकार ने Rs.18 करोड़ सांवलियाजी मंदिर मंडल के जिम्मे सौंपे, कोर्ट की रोक, प्रोजेक्ट पर संकट

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | सांवलियाजी

मेवाड़ के हरिद्वार मातृकुंडियां तीर्थ विकास प्रोजेक्ट पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। राज्य सरकार ने 18 करोड़ का यह पूरा प्रोजेक्ट सांवलियाजी मंदिर मंडल के जिम्मे कर दिया, मगर इसके विरुद्ध जनहित वाद पर कोर्ट ने फिलहाल यह राशि देने पर रोक लगा दी है।

न्यायालय सिविल न्यायाधीश मंडफिया के पीठासीन अधिकारी कुलदीप मस्तान ने शनिवार को अंतरिम आदेश में यह रोक लगाई। एडवोकेट मदन जैन सहित कस्बे के कैलाशचंद्र डाड, लक्ष्मीलाल गुर्जर, श्रवण तिवारी, शीतल डाड व प्रकाशचंद्र सोनी ने सांवलियाजी मंदिर मंडल अध्यक्ष व सीईओ के विरुद्ध स्थायी एवं आदेशात्मक निषेधाज्ञा का वाद दायर किया था। जिसमें कहा गया कि बोर्ड व सरकार अपने राजनीतिक लाभ के लिए श्रद्धालुओं द्वारा भेंट दानराशि को इस तरह लुटा रहे हैं। शुक्रवार को करीब 40 और लोग भी बतौर वादी शामिल हुए। देवस्थान विभाग के निर्देश पर गत 12 अप्रैल को मंदिर बोर्ड बैठक में मातृकुंडियां तीर्थ विकास के लिए 18 करोड़ देने का निर्णय पारित हुआ था। जिसमें से प्रथम चरण में आठ करोड़ की मंजूरी भी दे दी गई। जनहित वाद में इस पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा गया कि अगर ये राशि दे भी दी गई हो तो इसे वापस मंदिर निधि में जमा करवाने के लिए पाबंद कराया जाएं। मंदिर मंडल की ओर से पैरवी वकील नारायण सिंह खंगारोत ने की।

मातृकुंडियां के लिए रुपए देने से रोकने के लिए लोगों ने लगाई थी याचिका

सांवलियाजी. मंदिर मंडल की राशि को लेकर कोर्ट में वाद दायर करने वाले क्षेत्रवासी।

सीएम विजिट के समय चर्चा में आया मामला ... 16 अप्रैल को मुख्यमंत्री वसुंधराराजे के सांवलियाजी आगमन के समय ये मामला चर्चा में आया। देवस्थान विभाग द्वारा मंदिर मंडल को मातृकुंडियां प्रोजेक्ट के लिए 18 करोड़ रुपए देने के निर्देश पूरे नहीं होने पर सीएम ने मंदिर अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा को बुलाकर नाराजगी जाहिर की थी। ज्यादातर लोगों को तब ही पता चला कि मातृकृंडियां विकास के लिए सरकार पूरा पैसा सांवलियाजी मंदिर से लगवाना चाहती है। कस्बावासियों ने पहले सीएम को ज्ञापन और फिर कोर्ट में वाद दायर कर मंदिर का पैसा ले जाने पर रोक की मांग की। कोर्ट ने तथ्यों पर कोई टिप्पणी किए बिना मंदिर अधिनियम को ध्यान में रखते हुए राशि देने पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी।

25 लाख की डीपीआर तक का खर्चा सांवलिया सेठ से करवाया

वादियों द्वारा सूचना के अधिकार में ली गई जानकारी से पता चला कि जुलाई 2017 में मातृकुंडियां विकास की डीपीआर बनाने के लिए 25 लाख का खर्च भी सांवलियाजी मंदिर ने वहन किया। देवस्थान विभाग के दबाव में आनन-फानन में स्वीकृति दी गई। मातृकुंडियां तीर्थ विकास और वहां परशुराम पैनोरमा निर्माण की घोषणाएं सीएम ने अलग-अलग बजट में की थी। जिसके अनुसार दोनों कार्य राजस्थान धरोहर प्रोन्नति प्राधिकरण के माध्यम से होने है। अब खुलासा हुआ कि सरकार ने इसका पूरा बजट जिले के ही सांवलियाजी मंदिर पर डालते हुए प्रोजेक्ट में कार्यकारी एजेंसी भी उसे ही बना दिया। जिले में सीएम की यात्रा के महज आठ दिन पहले 9 अप्रैल को ही देवस्थान विभाग ने इसके लिए मंदिर मंडल को पत्र लिखा। बोर्ड ने तीन दिन बाद ही बैठक कर प्रस्ताव भी पारित कर दिया।

वाद में बताया यह कारण ... वाद के अनुसार मंडफिया के सुप्रसिद्ध सांवलियाजी मंदिर में देश के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु भेंट राशि चढ़ाते हैं। जिसे मंदिर निर्माण, श्रद्धालुओं की सुविधाओं एवं क्षेत्र में जनहित पर खर्च किए किया जा रहा हैं। करीब ढाई से तीन अरब रुपए के कार्यों में से कई अधूरे है तो कई प्रस्तावित है। सांवलियाजी मंदिर अधिनियम की धारा 28 के अनुसार भेंट राशि का उपयोग मंदिर परिक्षेत्र के 16 गांवों में ही खर्च करने चाहिए। राजनीतिक फायदे व दबाव के चलते पदाधिकारी इसे अन्य जगह भी उपयोग के लिए दे देते हैं, जो गलत है। वर्तमान में श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित पार्किंग, सुविधाजनक आवास, सर्वत्र शुद्ध पेयजल, शौचालय एवं गार्डन आदि की व्यवस्था नहीं है।

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