पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • कुएं की तलहटी के गंदे पानी को छान कर प्यास बुझाना मजबूरी

कुएं की तलहटी के गंदे पानी को छान कर प्यास बुझाना मजबूरी

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
वो हर दिन सुबह चार बजते ही पूरे परिवार के साथ हाथ में खाली बर्तन लेकर पानी के लिए घर से निकलते हैं। कुएं के चारों ओर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो जाती है तथा कई गांवों में तो रातभर पानी के जुगाड़ में लोग लगे रहते हैं। आशाकी व मरमदा गांव में करीब 20 फुट गहरे कुएं की तलहटी के गंदे पानी को छान-छान कर भरते हैं। जिसको जितना पानी मिल जाता है,उसी पानी से गुजारा होता है। गांव में जैसे ही कभी पानी का टैंकर आता है तो पहले कुएं में डालता है फिर ग्रामीण पानी को रस्सियों से खींचते हैं और जब कुएंं का पेटा दिखाई देता है, तब इस भीड़ में साहसी बच्चे रस्सी के सहारे कुएं में उतरकर कटोरे से पानी भरकर जुगाड़ करते हैं।

यह नजारा जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर देखने को मिल रहा है। जहां कुए व हैंडपंप सूख गए हैं। कई गांव ऐसे हैं जहां ग्रामीण पानी के लिए दो - तीन किलोमीटर का सफर कर रहे हैं। सपोटरा एसडीएम ने पानी की किल्लत देखते हुए सरपंचों की सिफारिश पर एक ठेकेदार को 26 अप्रैल को ही निभैरा व दौलतपुरा ग्राम पंचायत के 11 गांवों में 32 पानी के टैंकर स्वीकृत कर टैंडर भी जारी कर दिए हैं,लेकिन ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझ रही है। पहले तो ग्रामीण हैंडपंपों पर आश्रित थे,लेकिन वे अब हवा फैंक रहे हैं।

आशाकी गांव के ग्रामीण धूपसिंह गुर्जर, रेखसिंह,जगदीश व सतीश आदि ने बताया कि पीने के पानी को व पशुओं को एक कुईयां खोदकर पानी पिलाने जाते हैं,लेकिन वहां पानी पर्याप्त नहीं निकला है। वहीं एक माह में दर्जनों पशु प्यास के मारे दम तोड़ चुके हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव से करीब 1 किलोमीटर दूर स्थित एक कुएं में पानी का टैंकर डाल कर जाते है। जिससे महिलाओं को पानी के लिए परेशानी होती है तथा पहले तो कुआ ही अपनी प्यास बुझाता है फिर औरों की प्यास बुझाता है।

गांवों के लोग कैसे बुझाते हैं प्यास

गांव के लोगों की प्यास बुझाने के लिए गांव के पास ही ग्रामीणों द्वारा खोदी गई एक कुई से पानी छान छानकर लाते हैं, वही ठेकेदार द्वारा कुओं मे पानी के टैंकर खाली किए जा रहे हैं लेकिन पानी का टैंकर जैसे ही किसी गांव मे पहुंचता है तो पूरा गांव पानी भरने को दौड़ पड़ता है। पहले तो कुएं का पानी रस्सियों से खींचते हैं और जब कुएं का पेटा दिखाई देता है तब जान हथेली पर रखकर कुओं में रस्सियों से नीचे उतर कर कटोरे से पानी भरकर जुगाड़ करते हैं। महिलाएं पानी के लिए सुबह 4 बजे ही उठ जाती हैं कि कही कुएं में पानी खत्म ना हो जाए।

टैंकर को देखते ही दौड़ पड़ता है गांव

मरमदा के पास पाटौर गांव में न तो हैंडपंप हैं और ना ही कुआ है। जिससे पानी का टैंकर जैसे ही गांव में पहुंचता है तो महिलाएं बच्चे पानी के लिए हाथों में बर्तन लेकर दौड़ पड़ते हैं।

1 हैंडपंप से 70 परिवार बुझा रहे प्यास

निभैरा ग्राम पंचायत के मोरोची गांव मे एक हैंडपंप ही 70 परिवारों की प्यास बुझा रहा है। गांव के अन्य हैंडपंप भी खराब पड़े हैं, बिंदा देवी विमलेश, उम्मेदी, राधे, घनश्याम, रामराज गुर्जर आदि ने बताया कि पानी के लिए सुबह चार बजे से हैंडपंप पर लाईन लग जाती हैं, लेकिन वे भी हवा फेंक रहा है। रोज प्यास के कारण गायों की मौत हो रही है, पशुओं को 2 किमी दूर बरआरी नामक जगह पर पानी पिलाने जाते हैं, जबकि जलदाय विभाग से गांव में दो पानी के टैंकर स्वीकृत है, लेकिन आज तक ग्रामीणों ने पानी के टैंकर के तो दर्शन तक नहीं किए हैं।

इन गांवों में ज्यादा किल्लत

नानपुर ग्राम पंचायत के लडे़की डंगरिया, राहिर पंचायत के आमरेकी, गसीनपुरा, कूरतकी, अलवतकी, चौवेकी, घेरकापुरा, टोडा ग्राम पंचायत के दयारामपुरा, पाटौरन में पानी की भीषण समस्या बनी हुई है, लेकिन जलदाय विभाग व प्रशासन ने अभी तक कोई टैंकर स्वीकृत नहीं किए हैं।

कई ग्राम पंचायतों में पानी के टैंकर चल रहे हैं, जहां भी पानी की गंभीर समस्या है, वहां तुरंत व्यवस्था कराएंगे। - बुद्धिप्रकाश मीना, तहसीलदार, सपोटरा

ग्राम पंचायत दौलतपुरा व निभैरा में पानी के टैंकरों से नियमित पेयजल आपूर्ति की जा रही है। यदि किसी गांव में पानी के टैंकर नहीं पहुंच रहे हैं तो ठेकेदार से बात करेंगे।

करणपुर. निभैरा ग्राम पंचायत के पाटौर गांव में महिलाओं की पानी के लिए लगी टैंकर पर भीड़।

मुकेश गुप्ता | करणपुर

वो हर दिन सुबह चार बजते ही पूरे परिवार के साथ हाथ में खाली बर्तन लेकर पानी के लिए घर से निकलते हैं। कुएं के चारों ओर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो जाती है तथा कई गांवों में तो रातभर पानी के जुगाड़ में लोग लगे रहते हैं। आशाकी व मरमदा गांव में करीब 20 फुट गहरे कुएं की तलहटी के गंदे पानी को छान-छान कर भरते हैं। जिसको जितना पानी मिल जाता है,उसी पानी से गुजारा होता है। गांव में जैसे ही कभी पानी का टैंकर आता है तो पहले कुएं में डालता है फिर ग्रामीण पानी को रस्सियों से खींचते हैं और जब कुएंं का पेटा दिखाई देता है, तब इस भीड़ में साहसी बच्चे रस्सी के सहारे कुएं में उतरकर कटोरे से पानी भरकर जुगाड़ करते हैं।

यह नजारा जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर देखने को मिल रहा है। जहां कुए व हैंडपंप सूख गए हैं। कई गांव ऐसे हैं जहां ग्रामीण पानी के लिए दो - तीन किलोमीटर का सफर कर रहे हैं। सपोटरा एसडीएम ने पानी की किल्लत देखते हुए सरपंचों की सिफारिश पर एक ठेकेदार को 26 अप्रैल को ही निभैरा व दौलतपुरा ग्राम पंचायत के 11 गांवों में 32 पानी के टैंकर स्वीकृत कर टैंडर भी जारी कर दिए हैं,लेकिन ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझ रही है। पहले तो ग्रामीण हैंडपंपों पर आश्रित थे,लेकिन वे अब हवा फैंक रहे हैं।

आशाकी गांव के ग्रामीण धूपसिंह गुर्जर, रेखसिंह,जगदीश व सतीश आदि ने बताया कि पीने के पानी को व पशुओं को एक कुईयां खोदकर पानी पिलाने जाते हैं,लेकिन वहां पानी पर्याप्त नहीं निकला है। वहीं एक माह में दर्जनों पशु प्यास के मारे दम तोड़ चुके हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव से करीब 1 किलोमीटर दूर स्थित एक कुएं में पानी का टैंकर डाल कर जाते है। जिससे महिलाओं को पानी के लिए परेशानी होती है तथा पहले तो कुआ ही अपनी प्यास बुझाता है फिर औरों की प्यास बुझाता है।

गांवों के लोग कैसे बुझाते हैं प्यास

गांव के लोगों की प्यास बुझाने के लिए गांव के पास ही ग्रामीणों द्वारा खोदी गई एक कुई से पानी छान छानकर लाते हैं, वही ठेकेदार द्वारा कुओं मे पानी के टैंकर खाली किए जा रहे हैं लेकिन पानी का टैंकर जैसे ही किसी गांव मे पहुंचता है तो पूरा गांव पानी भरने को दौड़ पड़ता है। पहले तो कुएं का पानी रस्सियों से खींचते हैं और जब कुएं का पेटा दिखाई देता है तब जान हथेली पर रखकर कुओं में रस्सियों से नीचे उतर कर कटोरे से पानी भरकर जुगाड़ करते हैं। महिलाएं पानी के लिए सुबह 4 बजे ही उठ जाती हैं कि कही कुएं में पानी खत्म ना हो जाए।

टैंकर को देखते ही दौड़ पड़ता है गांव

मरमदा के पास पाटौर गांव में न तो हैंडपंप हैं और ना ही कुआ है। जिससे पानी का टैंकर जैसे ही गांव में पहुंचता है तो महिलाएं बच्चे पानी के लिए हाथों में बर्तन लेकर दौड़ पड़ते हैं।

1 हैंडपंप से 70 परिवार बुझा रहे प्यास

निभैरा ग्राम पंचायत के मोरोची गांव मे एक हैंडपंप ही 70 परिवारों की प्यास बुझा रहा है। गांव के अन्य हैंडपंप भी खराब पड़े हैं, बिंदा देवी विमलेश, उम्मेदी, राधे, घनश्याम, रामराज गुर्जर आदि ने बताया कि पानी के लिए सुबह चार बजे से हैंडपंप पर लाईन लग जाती हैं, लेकिन वे भी हवा फेंक रहा है। रोज प्यास के कारण गायों की मौत हो रही है, पशुओं को 2 किमी दूर बरआरी नामक जगह पर पानी पिलाने जाते हैं, जबकि जलदाय विभाग से गांव में दो पानी के टैंकर स्वीकृत है, लेकिन आज तक ग्रामीणों ने पानी के टैंकर के तो दर्शन तक नहीं किए हैं।

इन गांवों में ज्यादा किल्लत

नानपुर ग्राम पंचायत के लडे़की डंगरिया, राहिर पंचायत के आमरेकी, गसीनपुरा, कूरतकी, अलवतकी, चौवेकी, घेरकापुरा, टोडा ग्राम पंचायत के दयारामपुरा, पाटौरन में पानी की भीषण समस्या बनी हुई है, लेकिन जलदाय विभाग व प्रशासन ने अभी तक कोई टैंकर स्वीकृत नहीं किए हैं।

कई ग्राम पंचायतों में पानी के टैंकर चल रहे हैं, जहां भी पानी की गंभीर समस्या है, वहां तुरंत व्यवस्था कराएंगे। - बुद्धिप्रकाश मीना, तहसीलदार, सपोटरा

ग्राम पंचायत दौलतपुरा व निभैरा में पानी के टैंकरों से नियमित पेयजल आपूर्ति की जा रही है। यदि किसी गांव में पानी के टैंकर नहीं पहुंच रहे हैं तो ठेकेदार से बात करेंगे।

करणपुर. निभैरा पंचायत के आशाकी गांव में ग्रामीणों द्वारा खोदी गई कुंइया से छानकर पानी भरते लोग ।

खबरें और भी हैं...