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दो साल में भी नहीं बना क्षतिग्रस्त स्टाप डेम बारिश में फिर खतरा रहेगा हाईवे पुल को

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | सारंगपुर

मानसून आने में दो माह भी शेष नहीं बचे हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के यह हालत कि दो वर्ष पूर्व कालीसिंध नदी में आए उफान के दौरान पुल के पास बने स्टापडेम का एक हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। उस हिस्से को बनाने के लिए शासन, प्रशासन के जिम्मेदार इतने उदासीन हैं कि उन्हें आने वाले दो माह बाद पुल व उसके समीपस्थ गावों की क्या हालत होगी, उसको लेकर जरा भी चिंता नहीं है। बांध का एक लंबा हिस्सा ध्वस्त हो जाने के बाद पिछले दो सालों से टूटे हिस्से में बोरी बंधान कर पानी को रोका जा रहा है। बांध का एक हिस्सा टूटने के बाद उसके निर्माण के लिए 80 लाख रुपए का एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया था।

जो दो साल में बाद भी लंबित। क्षतिग्रस्त हिस्से को लेकर न तो जनप्रतिनिधि गंभीर हैं न ही शासन स्तर से किसी ने भी सुध ली है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि स्वयं नपाध्यक्ष इस ज्वलंत समस्या को लेकर मुख्यमंत्री तक से मिल चुकी हैं, लेकिन कोई परिणाम अभी तक नहीं निकल सका है। वर्तमान में नदी सूखी हुई है। अगर समय रहते बांध के हिस्से का कार्य शुरु नहीं किया गया, तो आने वाली बारिश के दौरान फिर से पुल को खतरा पैदा हो जाएगा।

बाढ़ में ध्वस्त हुआ था बांध का हिस्सा

2016 में अगस्त माह में कालीसिंध नदी में आई बाढ़ के कारण डेम का जयनगर तरफ करीब 30 फीट का हिस्सा पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था।

इस कारण पानी के तेज प्रवाह ने अपनी दिशा बदलकर करीब 50 फीट जमीन के हिस्से का कटाव कर वहां बनी दुकानों और 200 मीटर लंबे पुल के लिए खतरा बन गया था। इसके बाद जल संसाधन विभाग ने डेम बनाने रुचि नहीं दिखाई। परिणाम स्वरूप दूसरी बारिश में पानी के तेज बहाव से हुए कटाव के कारण पुल और क्षेत्र के घरों के लिए खराब बन गया था। इसके बावजूद प्रशासन डेम बनाने की बजाए मिट्टी व बोरी बंधान कर पानी रोकते आ रहा है। क्षतिग्रस्त होने के बाद नपा ने बनाया था, लेकिन लेकिन तब तक नदी का पानी बह चुका था। बाद में मानसून की मेहरबानी हुई और बारिश होने से नदी में पानी आ गया था। जिससे पानी की समस्या कुछ हद तक दूर हुई। अगर अब भी समय रहते पक्का बांध नहीं बनाया गया, तो बारिश में परेशानी के साथ गर्मियों में परेशानी का कारण भी बनेगा।

नदी के तेज बहाव से टूटे हिस्से की तरफ मिट्टी का कटाव होने से पुल ढहने का खतरा बढ़ा

निर्माण नहीं होने से वैकल्पिक रूप से पानी रोकने किया जाता है बोरी बंधान।

इसलिए अटक रहा निर्माण का मामला

एक हिस्सा टूटने से पुल, दुकान व घरों को नुकसान की संभावना को देखते हुए आनन-फानन में एसडीएम ने पानी के बहाव को डायवर्ड करने बगैर जल संसाधन विभाग को बताए डेम के दूसरे हिस्से को तुड़वा दिया था। इस पर विभाग ने यह कहते हुए विरोध जताया था कि इतने बड़े मसले को बताना तक उचित नहीं समझा। हालांकि बाद में जल संसाधन विभाग ने कलेक्टर के माध्यम से 1 करोड़ 70 लाख रुपए का एस्टीमेट बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा गया था, जो अभी तक पेंडिंग है। वहीं स्थानीय प्रेस क्लब ने भी कलेक्टर से मिलकर बांध के टूटे हिस्से को शीघ्र बनवाने की मांग की। इस पर उन्होंने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

अभी तक स्वीकृत नहीं हुई राशि

क्षतिग्रस्त बांध के निर्माण के लिए राशि स्वीकृत नहीं हुई है। इस संबंध में जल संसाधन विभाग सहित कलेक्टर को कई बार लिखा गया है। हम मुख्यमंत्री से मिलकर अवगत करा चुके हैं। लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। -रूपल प्रमोद सादानी, नपाध्यक्ष सारंगपुर

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