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छोटों को गले लगाकर भगवान ने प्रेम का पाठ सिखाया : पं. चैतन्य बापू

3 वर्ष पहले
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पूर्णाहुति और सुदामा प्रसंग के साथ श्रीमद् भागवत कथा समापन

भास्कर संवाददाता| सारंगपुर

भगवान तो प्रेम के भूखे हैं, सच्चे दिल से उसे याद करने पर वह स्वयं सहायता करने के लिए दौड़े चले आते हैं। भगवान ने समरसता का भाव जगाते हुए बिना ऊंच नीच छुआछूत और भेदभाव के गरीबों को केवट को आदिवासियों, बंदर और भालू तक को गले लगाकर प्रेम का संदेश सिखाया है। यह बात गुलावता गांव में आयोजित श्री राम कथा के समापन दिवस पर भगवान चैतन्य बापू ने अपने अमृतवाणी से कही। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम ने प्रेम के वश भील जाति की शबरी के झूठे बेर खाए, केवट को गले लगाया, वानर भालू तक को अपनी सेना में शामिल कर लंका के अभिमानी राजा का वध किया। भगवान श्रीराम ने सभी के साथ मिलकर समरसता के भाव से एकता का पाठ पढ़ा कर रावण का वध कर जीत हासिल की।

कथा के समापन दिवस पर बापू से आशीर्वाद लेने के लिए पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह, नारायण सिंह आमलाबे, कृष्ण मोहन मालवीय, पूर्व मंडी अध्यक्ष मोहन सिंह सोलंकी, विष्णु पाटीदार, गिरिराज गुप्ता, प्रताप मंडलोई, नंदलाल नागर, डॉ भरत वर्मा, देवेंद्र पाराशर, नीलू दुबे, अर्चना यादव, विक्रम सिंह, बेस प्रदीप सादानी, हीरालाल मालवीय, छोटू माहेश्वरी, राम प्रसाद माहेश्वरी, कैलाश काका, प्रकाश पुरोहित, सीताराम लहरी, मोहम्मद अली, समीर मेवाती अादि मौजूद रहे।

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