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गुलावता में चल रही राम कथा का लाभ लेने बड़ी संख्या में शामिल हो रहे श्रद्धालु

3 वर्ष पहले
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गुलावता में चल रही राम कथा का लाभ लेने बड़ी संख्या में शामिल हो रहे श्रद्धालु

सारंगपुर | सद्गुरु द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने से ही मनुष्य का जीवन सफल होता है और उस सद्गुरु को देखने के लिए दिव्य चक्षु की आवश्यकता होती है। बिना सद्गुरु के मनुष्य का उद्धार नहीं हो सकता। यह बात गुलावता में आयोजित सात दिवसीय श्री राम कथा में प्रखर संत भगवान बापू महाराज ने श्रोताओं से कही। उन्होंने कहा कि तरह कुम्हार एक ही मिट्टी से पानी का घड़ा और उसी मिट्टी से चिलम का निर्माण करता है। लेकिन निर्माण के बाद पानी का वही घड़ा लोगों को शीतलता प्रदान करता है और वही चिलम लोगों के दिल और दिमाग को जलाती है। यदि मनुष्य को जीवन में सच्चे गुरु की शरण मिल जाती है, तो उसका जीवन शीतल घड़े की तरह शांत होकर जीवन सफल हो जाता है, अन्यथा पूरा जीवन चिलम की तरह जलता रहता है।

मनुष्य को जब संसार में सारे सहारे छूट जाते हैं, तब परमात्मा का एक ही सहारा शेष रहता है, जो कि मनुष्य के जीवन को भवसागर से पार लगा देता है। इतिहास गवाह है कि नरसिंह मेहताजी ने भी अपनी 56 करोड़ की संपत्ति सिर्फ राम नाम पाने के लिए छोड़ दी थी। राम नाम वह धन है, जो दिन पर दिन बढ़ता रहता है। कथा में पूर्व विधायक कृष्ण मोहन मालवीय, दुर्गेश सोमानी, मोहन सिंह सोलंकी, राम प्रसाद माहेश्वरी, विक्रम सिंह बेस, प्रेम प्रकाश गुप्ता, दुर्गा मामा, घनश्याम पाटीदार, रीना मालवीय, अशोक काकाणी, कला मालवीय आदि मौजूद रहे।

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