सारंगपुर | आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति के चक्कर में पड़कर अपने मार्ग से भटक कर परेशान हो रही है। उनका कोई सहयोग नहीं करता है। लेकिन सनातन संस्कृति के साथ जो सन्मार्ग पर चलता है, उसका हर कोई सहयोग करता है। यह बात ग्राम गुलावता मे चल रही श्रीराम कथा के आठवें दिन रविवार को प्रसिद्ध कथावाचक भगवान चैतन्य बापू ने हजारों की संख्या में मौजूद श्रोताओं से कही। उन्होंने भरत की कथा सुनाते हुए आगे कहा कि भरत तो साक्षात त्याग की प्रतिमूर्ति थे। इस अवसर पर पूर्व विधायक गौतम टेटवाल, कृष्णमोहन मालवीय, निर्मल जैन, ओम पुष्पद, ललित पालीवाल, ओपी विजयवर्गीय, रमेश पुष्पद, गेंदालाल पाल, मोहनसिंह सोलंकी, गुलाबसिंह सुस्तानी, मोहन पाल, रीना मालवीय, नंदलाल नागर, डॉ. श्रीराम देथलिया, दुर्गेश सोमानी आदि मौजूद रहे।