गुलावता में चल रही श्रीराम कथा में शामिल श्रद्धालु कथा सुनते हुए।
गुलावता में आयोजित श्रीराम कथा में शामिल हुए राघौगढ़ विधायक सहित कई नेता और सैकड़ों श्रद्धालु
भास्कर संवाददाता | सारंगपुर
संसार की विषय वासना एवं वस्तु की आसक्ति व्यक्ति को पतन की ओर ले जाती है। आदि अनादि काल से त्याग के कारण ही व्यक्ति महान बनता रहा है। श्री राम राज सत्ता त्याग कर वन में गए तो भगवान बन गए। यह बात गुलावता में चल रही श्री रामकथा के छठे दिन प्रसिद्ध कथावाचक भगवान चैतन्य बापू ने उपस्थित श्रोताओं के बीच कही। उन्होंने आगे कहा कि एक दिन पहले जिन्हें अयोध्या का राज्य देने की घोषणा कर दी गई। रात्रि भर में माता-पिता ने वनवास दिया, तो भगवान श्रीराम हंसते-हंसते वन को चल दिए।
लक्ष्मण के त्याग की कथा सुनाते हुए भगवान बापू ने कहा कि कैकई के द्वारा बनवास श्री राम जी को दिया गया, लेकिन सुमित्रा नंदन लक्ष्मण ने भैया-भाभी की सेवा के लिए 14 साल तक महल के सुखों का त्याग किया। जबकि आजकल के भाई भले ही संपत्ति में बंटवारा करते हो, लेकिन त्रेतायुग के रामायण के भाइयों ने विपत्ति में बंटवारा किया है। बड़े भाई को माता-पिता ने वनवास दे दिया, तो छोटे भाइयों ने भी अवध के सिंहासन को स्वीकार नहीं किया। रामचरितमानस का एक एक पात्र हमें जीवन जीने की शिक्षा देता है। श्री राम कथा क अनुकरण करके अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। कथा को घर तक ले जाएं। बापू ने कहा कि राम कथा सुनकर कोई एक भी रामायण जैसी सास, रामायण जैसा भाई, रामायण जैसी बहू, विभीषण जैसा भक्त यदि बन गया, तो मेरा कथा सुनाना सफल हो जाएगा। इस अवसर पर राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह , पूर्व विधायक कृष्णमोहन मालवीय, रामचंद्र दांगी, प्रदीप सादानी, मोहनसिंह सोलंकी, कैलाश जावरिया, राधेश्याम काका, कैलाश मामा, दुर्गेश सोमानी, सुमित सोनी, अशोक पुष्पद, सतीश गिरजे सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।