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शहर के अस्तित्व को बचाने आज से आमरण अनशन पर बैठेंगे 88 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी
सारनी। नगर बचाओ, उद्योग बचाओ समिति ने रात में शहर में निकाली मशाल रैली।
दूर नहीं हुई बेरोजगारी, प्रशासन का कोई ध्यान नहीं
संघर्ष समिति के राकेश महाले ने कहा 15 दिनों से चल रहे आंदोलन की ओर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। जनहित की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगार खत्म कर उद्योग-रोजगार और नगर के अस्तित्व को बचाने के लिए कोई गंभीर नहीं दिखा। इस क्षेत्र का विकास संघर्ष के रास्ते पर चलकर ही हो सकेगा। अब यह संघर्ष रुकने वाला नहीं है। इसलिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कृष्णा मोदी को आमरण अनशन पर बैठना पड़ रहा है। धरना स्थल पर संगीता कापसे, पार्षद सुनीता चढ़ोकार, छाया फोफसे, सुशीला फोफसे, याशीन खान, सुमन वाईकर, बलजीत कौर, शारदा बाई समेत अन्य लोग उपस्थित थे।
लिखित समर्थन दिया तो नपाध्यक्ष क्यों नहीं आई आंदोलन में: देशमुख
सारनी। उद्योग बचाओ, नगर बचाओ समिति के बैनर तले चल रहे प्रदर्शन में नपाध्यक्ष की अनुपस्थिति पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्षद ने सवाल खड़े किए हैं। पार्षद संतोष देशमुख ने कहा जब समर्थन दिया तो 15 दिनों में एक दिन भी नपाध्यक्ष यहां क्यों नहीं आईं। भाजपा ने तो इससे पहले ही किनारा कर लिया था, लेकिन नपाध्यक्ष तो निर्दलीय है और वे आंदोलन में शामिल हो सकती हैं, फिर दूरियां क्यों। आम जनता ने विश्वास कर चुनाव जिताया पर नपाध्यक्ष इस ओर ध्यान ही नहीं है।
अभी तक 68 लोगों ने की क्रमिक भूख हड़ताल सबसे ज्यादा आखिरी दिन
आंदोलन लगातार 15 दिनों से आंदोलन चल रहा है। इसमें अब तक 68 लोग हड़ताल पर बैठ चुके हैं। क्रमिक भूख हड़ताल के आखिरी दिन मंगलवार को सबसे ज्यादा 12 सत्याग्रही हड़ताल पर बैठे। इसमें संगीता डेहरिया, श्रीमती लक्ष्मी गोहे, ममता साहू, पार्वती उइके, महेंद्र कौर गिल, लक्ष्मी साहू, माया वर्मा, नसरीन कुरैशी, वैशाली रोतिया पुरुषों में कामरेड रामू पवार, रमेश भूमरकर, संदीप खादीपुरे हड़ताल पर बैठे।