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कलश यात्रा के साथ शतचंडी महायज्ञ शुरू

3 वर्ष पहले
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सरवाड़| बांक्याराणी मंदिर स्थल पर 21 कुंडात्मक शतचंडी महायज्ञ का शनिवार को कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। छापर बालाजी महंत शंभुदास महात्यागी के सान्निध्य में प्रारंभ हुए 21 कुंडात्मक शतचंडी महायज्ञ के मौके पर निकाली कलश यात्रा ने पूरे शहर को भक्ति रस में सरोबार कर दिया। सुबह साढ़े 8 बजे भीमेश्वर महादेव मंदिर में कलशाें की पूजा अर्चना के बाद कलश यात्रा प्रारंभ हुई। कलश यात्रा में सबसे आगे श्रद्धालु सिर पर भागवत लेकर चल रहे थे। पीछे भगवान ठाकुर की झांकी चल रही थी। बीच में महिलाएं डीजे की धुनों पर नाचते गाते हुए चल रही थी। कलश यात्रा में संत महात्मा सजे धजे वाहनों में सवार होकर चल रहे थे।

भीमेश्वर महादेव मंदिर से प्रारंभ हुई कलश यात्रा बस स्टैंड, गांधी चौक, सदर बाजार, पारीक मोहल्ला, गुर्जर मोहल्ला, किले का चौक होते हुए यज्ञ स्थल पहुंची जहां यज्ञाचार्य पंडित राजेन्द्र प्रसाद तिवाड़ी व ओमप्रकाश पारीक ने अगवानी करते हुए सभी कलशों की पूजा-अर्चना कराई। कलश यात्रा तीन किलोमीटर लंबे जुलूस के रूप में बांक्याराणी मंदिर यज्ञ स्थल पहुंची।

कलश यात्रा में सरवाड़ सहित आसपास के गांवों से महिलाएं शामिल हुई। विगत लम्बे समय बाद सरवाड़ में हो रहे यज्ञ को लेकर लोगों में उत्साह का माहौल है। इसे लेकर सरवाड़ सहित आसपास के गांवों के लोग सहयोग कर रहे हैं। छापर वाले बालाजी जड़ाना के महंत शंभुदास महात्यागी के सान्निध्य में होने वाले महायज्ञ विभिन्न शहरों संत महात्माओं का आने का क्रम शुरू हो गया है। शनिवार को दशविधि, सर्व प्रायश्चित नांदी, श्राद्ध मंडप प्रवेशादि आदि कार्यक्रम आयोजित हुए। इस दौरान हिन्दू उत्सव समिति अध्यक्ष छगनलाल रेगर, विहिप प्रखंड अध्यक्ष कन्हैयालाल माली, राधेश्याम पोरवाल, राजेश शर्मा, विजय शंकर मूंदड़ा, संजय शर्मा, रामस्वरूप प्रजापत, भगवान प्रसाद भट्ट, राजेन्द्र अग्रवाल, पार्षद प्यारेलाल खिंची, फुतरा माली, राधेश्याम रेगर, लक्ष्मीनारायण गहलोत, कुलदीप सिंह, नाथु गुर्जर, रामस्वरूप वैष्णव, मोखम खिंची, रामदेव माली, ओमप्रकाश लौहार, ओमप्रकाश शर्मा, मांगीलाल माली, घीसालाल प्रजापत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम में भागवत का लाभ कन्हैयालाल माली ने लिया।

ईश्वर की कृपा का मिलता है प्रसाद : महंत शंभुदास महात्यागी महाराज ने कहा कि यज्ञ ईश्वरीय उपासना का ही अंग है। केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने में भी यज्ञ-हवन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रभु की शरणागति जाने वाले को ही ईश्वर की कृपा का प्रसाद मिलता है और शरणागति उसे मिलती है। इसके हृदय में नम्रता व विनय का भाव है जहां अहंकार है वहां प्रभु की शरणागति नहीं है। महाराज ने कहा कि ईश्वर को प्राप्त करने के लिए प्रेम और निश्छल भाव से की गई भक्ति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सुख-दुख, मान-अपमान, यश-अपयश, हानि-लाभ ये सब ईश्वर के हाथ है। व्यक्ति को केवल सत्कर्म करते रहना चाहिए।

अरणी मंथन के साथ होगा यज्ञ : 20 मई को अरणी मंथन के साथ यज्ञ प्रारंभ होगा। इसी दिन भागवत कथा का भी श्री गणेश होगा। 21 मई से 26 मई तक यज्ञ के दौरान यजमानों की ओर से शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ हवन कर आहुतियां दी जाएगी एवं संत-महात्माओं के प्रवचन होंगे। 27 मई को यज्ञ की पूर्णाहुति होगी व भंडारे के साथ प्रसाद वितरण, आरती और संतों की विदाई का कार्यक्रम होगा। बाल व्यास महंत शत्रुघ्न दास स्वामी भागवत कथा करेंगे। पंडित दीपक दाधीच यज्ञाचार्य व घीसाराम गुर्जर प्रधान पुजारी होंगे।

सरवाड़. शतचंडी महायज्ञ को लेकर निकाली कलश यात्रा में शामिल पुरुष व महिलाएं।

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