केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा सरकारी पदाधिकारियों की मिलीभगत से दम तोड़ रही है। इसका खुलासा तब हुआ जब सीएफटी की टीम मनरेगा योजना की जांच करने के लिए बकोरिया पंचायत पहुंची। टीम ने पाया कि बुधराम सिंह के खेत में 3 लाख 51 हजार की लागत से सिंचाई कूप निर्माण के लिए 15 मई 2018 को डिमांड निकाला गया था। जबकि 16 मई को जब जांच टीम पहुंची, तो पाया कि एक ही दिन में लगभग 15 से 18 फीट तक कूप की खुदाई कर दी गई है। इसे देखकर टीम को संदेह हुआ और जांच-पड़ताल अपने स्तर से शुरू कर दी गई।
जांच के दौरान यह बात सामने आयी कि योजना में जेसीबी से काम करवाया गया है। इसकी शिकायत जिला के पदाधिकारियों तक पहुंची, जहां डीडीसी पलामू बिंदु माधव सिंह ने कार्रवाई करते हुए तत्काल बीडीओ अमित कुमार को शो कॉज किया। साथ ही संबंधित कार्य एजेंसी पर भी शो कॉज करने की बात कही। उल्लेखनीय है कि यह सिंचाई कूप निर्माण के लिए 5 मई 2017 को स्वीकृत हुआ था। इस योजना की शुरुआत तब हुई जब सुनीता देवी, बबीता देवी, चौथी सिंह, पछिया देवी, महावीर सिंह, शांति देवी, श्यामदेव सिंह, बुधराम सिंह, अनीता देवी, कुंती देवी के नाम से मास्टर रोल निकाला गया। जबकि इसी प्रकार 22 मई 2018 से 28 मई 2018 तक का भी मास्टर रोल इन्हीं लोगों के नाम से निकाल लिया गया था। पर मास्टर रोल में कौन कितना दिन काम किया है यह नहीं दर्शाया गया। झाविमो प्रखंड अध्यक्ष आशीष कुमार सिन्हा ने कहा कि जब से बीडीओ का प्रभार अमीत कुमार ने लिया है तब से योजनाओं में भ्रष्टाचार चरम पर है। इस संबंध में डीसी, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री को भी लिखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रखंड में चल रहे तमाम योजनाओं की जांच कर बीडीओ पर सीधे कार्रवाई करें।
सतबरवा में खोदा गया कूप।