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नियम 134 में दाखिल विभिन्न कक्षाओं के बच्चों को एक क्लॉस में बैठाता है निजी स्कूल, बस सेवा भी नहीं मिलती

3 वर्ष पहले
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सतनाली मंडी | कस्बे के बाढड़ा रोड स्थित एक निजी स्कूल के प्रबंधन पर नियम 134-ए के तहत दाखिल अलग-अलग कक्षाओं के 9 छात्रों के साथ कथित दुर्व्यवहार एवं स्कूल बस में नहीं बैठाने का अभिभावकों ने आरोप लगाया है। बुधवार इस संबंध में पीड़ित अभिभावकों ने सतनाली थाने में शिकायत देकर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

सतनाली पुलिस को दी शिकायत में धनपति, निर्मला, कृष्णा, सावित्री, कृष्णा, किताबो, पिंकी, सरपंच बारड़ा दयाचंद, करतार सिंह लांबा, धर्मन्द्र, राजबीर, सोमबीर, जागेराम, राजेश, मान सिंह, पवन सिंह, मदन सिंह, सतप्रकाश, सूरजभान, जयबीर व जोगेन्द्र आदि परिजनों एवं ग्रामीणों ने बताया कि के सतनाली में बाढड़़ा रोड स्थित एक निजी स्कूल में उनके बच्चों का नियम 134-ए के तहत दाखिला कराया गया है, लेकिन स्कूल प्रबंधन इन बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग कक्षाओं के इन सभी बच्चों को एक ही कमरे में बैठा दिया जाता है और कोई अध्यापक इनको पढ़ाने नहीं आता है। स्कूल द्वारा अन्य विद्यार्थियों के लिए निर्धारित बस किराया देने के लिए सहमत होने के बावजूद भी इनको बस में नहीं बैठाया जा रहा है।

शिकायत में कहा गया है कि बुधवार सुबह बारड़ा गांव में जब परिजनों ने बस चालक-परिचालक ने याचना की तो उन्होंने इन बच्चों को बिठाने से मना कर दिया। फिर स्कूल के ट्रांसपोर्ट इंचार्ज अनिल ने मौके पर पहुंचकर बच्चों को स्कूल बस में बैठाया, लेकिन छुट्टी होने के बाद जब बस में बच्चे नहीं आए और पूछने पर बताया गया कि बच्चे स्कूल में ही हैं तो उन्होंने बस को वहीं रुकवा लिया और सतनाली थाने में सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के बच्चों को घर भिजवाने के आश्वासन पर बस करवा दिया। परिजनों ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि स्कूल के ट्रांसपोर्ट इंचार्ज अनिल ने बारड़ा गांव के लिए 3000 रुपए प्रति बच्चा प्रतिमाह देने पर दूसरी बस लगाने की बात कह रहा है, जबकि इसी स्कूल में दूसरे बच्चों से यहां तक 600 रुपए प्रति बच्चे प्रतिमाह लिया जा रहा है।

थाने में एकत्रित परिजनों ने थाना प्रभारी सतबीर सिंह को बताया कि उन्होंने स्कूल प्रबंधन के इस दुर्व्यवहार की शिकायत शिक्षा विभाग के बीईओ से लेकर शिक्षामंत्री तक की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। थाना प्रभारी सतबीर सिंह ने मामले को लेकर शिक्षा विभाग के बीईओ बिजेन्द्र श्योराण सहित जिला उपायुक्त कार्यालय एवं एसडीएम को मामले से अवगत कराया। मामला पुलिस में जाने एवं प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद स्कूल में रखे गए बच्चों को पुलिस की मौजूदगी में घर भेजा।

स्कूल प्राचार्य धर्मेन्द्र ने बताया कि इन बच्चों के अभिभावकों को एडमिशन के समय ही बता दिया गया था कि उन्हें बस सुविधा नहीं मिलेगी और अपने स्तर पर स्कूल आना-जाना पड़ेगा। बच्चों से दुर्व्यवहार के आरोपों को निराधार बताते हुए उन्होंने सभी बच्चों को एक ही कमरे में बैठाने के सवाल पर बताया कि स्कूल के लेवल के हिसाब से इन बच्चों का बौद्धिक स्तर कम है अत: इनको प्रोजेक्टर के माध्यम से कमरे में बैठाकर पढ़ाया जाता है।

थाना प्रभारी ने जिला प्रशासन को करवाया मामले से अवगत : सूचना मिलने के उपरांत थाना प्रभारी सतबीर सिंह ने इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के बीईओ, डीईओ, जिला उपायुक्त कार्यालय नारनौल, एसडीएम महेन्द्रगढ़ आदि अधिकारियों को दी। थाना प्रभारी सतबीर सिंह ने बताया कि सारे मामले में जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग को अवगत करा दिया है। एसडीएम उत्तम सिंह ने कहा कि मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी। इसके उपरांत थाना प्रभारी सतबीर सिंह स्कूल पहुंचे और वहां से प्राचार्य से बातकर स्कूल में रुके बच्चों को लगभग सांय 6 बजे स्कूल से घर के लिए रवाना किया।

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