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रणथंभाैर की बाघिन टी-92 ने कैलादेवी के जंगल में दो शावकों को दिया जन्म

3 वर्ष पहले
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रणथंभौर अभयारण्य की बाघिन टी 92 ने दो शावकों को जन्म दिया है। रणंथभौर अभयारण्य के ही हिस्से कैलादेवी सेंचूरी के मंडरायल में इसके साथ दो शावक देखे जाने के बाद विभाग में खुशी की लहर है। यह पहला मौका है जब कैला देवी अभयारण्य मे किसी बाघिन ने शावकों को जन्म दिया है।

जानकारी के अनुसार रणथंभौर अभयारण्य की बाघिन टी 92 टी 11 की बेटी है, जो रणथंभौर अभयारण्य के भिड वन क्षेत्र में जन्मी थी। यह बाघिन करीब साढे चार साल की है। ये टी 72 सुल्तान के बच्चे माने जा रहे हैं। मूल रूप से टी 72 का पिता टी 24 था, जो किन्हीं कारणों से रणथंभौर से हटाकर उदयपुर भेज दिया गया। वन विभाग के अनुसार इन शावकों की आयु करीब साढे़ तीन माह के करीब है।

विलेज वाइल्डलाइफ वाॅलेंटियरों ने दी जानकारी

रणथंभौर अभयारण्य में पहली बार वन विभाग द्वारा सीसीएफ वाईके साहू के प्रयासों से गांवों में विलेज वाइल्डलाइफ वाॅलेंटियरों की टीम खडी की गई है। ये वाॅलेंटियर समय समय पर अपने गांव के आसपास एवं पास के जंगल एवं वन्यजीवों तथा जंगल के बारे में विभाग को आवष्यक सूचनाएं देते रहते हैं। मंडरायल में इस बाघिन के साथ दो शावकों के दिखाने की सूचना भी विभाग के अधिकारियों को इनके द्वारा दी गई है। सूचना के साथ ही इन वाॅलेंटियरों ने रणथंभौर अभयारण्य के साथ केला देवी सेंचूरी में अपनी उपयोगिता एवं अहम भूमिका को सार्थक किया है। सामान्य रूप से यह सूचना नहीं मिलती तो विभाग को इस बाघिन के मां बनने के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती।

सवाई माधोपुर. बाघिन के साथ दिखाई दिए शावक।

खांडल ने की पुष्टि
प्रदेश की वाइल्डलाइफ कमेटी के सदस्य धर्मेंद्र खांडल को वाॅलेंटियरों एवं अधिकारियों से जानकारी मिलने के बाद टीम के साथ मंडरायल जाकर इस बाघिन की निगरानी की। खांडल ने इस बाघिन एवं दोनों शावकों को वाॅलेंटियरों की मदद से खोजने के बाद इनकी तस्वीर कैमरे में कैद की । खांडल ने बताया कि देखने में शावक करीब साढे तीन माह के दिखाई दे रहे हैं। मंडरायल में शावकों का जन्म यहां के बाघों का रणथंभौर के ही दूसरे हिस्सों मे जाकर शावकों को जन्म देना रणथंभौर एवं बाघों के विस्तार का प्रमाण है, जो अपने आप में एक सकारात्मक संकेत है।

यह खुशी की बात
बाघिन टी 92 के दो शावक रणथंभौर अभयारण्य के ही हिस्से कैलादेवी सेंचूरी में मंडरायल के जंगलों में देखे गए हैं। इन शावकों का पता लगाने में रणथंभौर के विलेज वाइल्डलाइफ वाॅलेंटियर्स की अहम भूमिका रही है। यह खुशी की बात है कि इस बाघिन ने मंडरायल में जाकर शावकों को जन्म देने के साथ ही बाघ विहीन हो चुके वहां के जगलों को आबाद किया है। विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारयिों की टीम इसस बाघिन एवं शावकों पर निगरानी रखेगी। वाईके साहू, सीसीएफ वन्यजीव

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