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अमरूद के बाग में बाघ-बाघिन का डेरा, वंश बढ़ाने की तैयारी

3 वर्ष पहले
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सवाई माधोपुर | इन दिनों रणथंभौर में बाघों को लेकर उथल-पुथल मची हुई है। बुधवार को एक बार फिर दो बाघों ने वन विभाग को दौड़ लगवा दी। वन विभाग के साथ-साथ पुलिस को भी दिन भर भीड़ से माथापच्ची करनी पड़ी। इस बार कुंडेरा गांव के पास एक नर एवं मादा बाघ ने अमरूद के बगीचे में डेरा डाल दिया। माना जा रहा है कि यह जोड़ा कई दिनों से इस इलाके में मूवमेंट कर रहा है। बाघ परियोजना के एसीएफ संजीव शर्मा से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह एक ग्रामीण ने क्षेत्र के रेंजर को उसके अमरूद के बगीचे में दो बाघों के मौजूद होने की सूचना दी थी। सूचना मिलने पर रेंजर ने बगीचे में जाकर पड़ताल की तो वहां एक नर एवं मादा दिखाई दिए। इसके बाद संजीव शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। बाघ को देखने के लिए कुंडेरा एवं आसपास के लोगों की भीड़ जमा होना शुरू हो गई।

सवाई माधोपुर. अमरुद की बगीचे में दिखाई दिए बाघ-बाघिन।

बाघिन टी-73: यह बाघिन इस समय कचीदा वन क्षेत्र में रह रही है। मूल रूप से टी-17 की तीन संतानों में से एक इस बाघिन के पूर्व के पूर्व में हुए प्रसव में एक नर एवं एक मादा है। उक्त दोनों शावक अब मां से अलग होने के कारण यह बाघिन अकेली है और अब मेटिंग कर रही है। छह साल की यह मादा बाघिन इस समय टी-80 के साथ जंगल से बाहर आकर मेटिंग कर रही है।

बाघ टी-80 : यह बाघ लंबे समय तक रणथंभौर से गायब रहा था और लगभग दो साल तक करौली जिले के करणपुर वन क्षेत्र में विचरण करता रहा। कुछ समय पहले ही यह बाघ वापस रणथंभौर में आया है और इन दिनों यह जंगल के चिरोली एवं अणतपुरा वन क्षेत्र में विचरण कर रहा था। इस बाघ की उम्र लगभग पांच साल है।

यह जोड़ा मेटिंग के लिए जंगल से बाहर एकांत देख कर अमरूदों के बगीचे में जमा हुआ है। कुछ दिनों से इनका मूवमेंट इस इलाके में नोट किया जा रहा था। जब तक ये यहां हैं, इन पर निगरानी के लिए टीम लगा दी गई है। एसीएफ, संजीव शर्मा

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