शहर हरसहायजी के कटले में बनी गोशाला के फिरेंगे दिन
शहर सवाई माधोपुर स्थित हरसहायजी के कटले में मोरचुगा के पास बनी गोशाला के दिन अब फिरने वाले हैं। जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रही और लोगों के लिए कचरे पात्र के रूप में काम आने वाली इस गोशाला में अब विकास कार्य करवाए जाएंगे, जो बुधवार से शुरू हो गए हैं। श्रमिकों ने गोशाला में खेळ का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, जिससे गायों को चारा खाने में असुविधा नहीं होगी। साथ ही लोग भी निर्धारित स्थान पर गायों के लिए चारा डाल सकेंगे।
शहर निवासी गोसेवक हनुमान मित्तल ने बताया कि शहर स्थित हरसहायजी के कटले में मोरचुगा के पास कई वर्षों पहले गोशाला का निर्माण हुआ था। इस गोशाला में गायों में रखने के साथ ही उनके लिए हरे चारा सहित खान-पानी का इंतजाम रहता था। लोगों की अनदेखी तथा रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे यह गोशाला जर्जर होती चली गई। इसका फर्श कई जगह से उखड़ चुका है। साथ ही यहां गायों के लिए टीनशेड की भी कोई व्यवस्था नहीं है। गायों के लिए बनी खेळ आदि भी जर्जर हो गई है। समय बीतने के साथ-साथ लोगों ने यहां कचरा डालना भी शुरू कर दिया। आसपास के लोग घरों से निकलने वाला दिनभर का सारा कचरा एवं गंदगी इसी गोशाला में डाल देते हैं, जिससे यहां पर जगह-जगह से कचरे एवं गंदगी के ढेर लग जाते हैं और यहां आने वाले गायें दिनभर कचरे में मुंह मारती रहती है
आमजन के सहयोग से होंगे कार्य : इस गोशाला में विकास कार्य शहर के आमजन के सहयोग से किया जा रहा है। इसके लिए शहर के अलग-अलग जगहों पर रहने वाले लोगों ने अपनी इच्छानुसार कुछ राशि इस गोशाला के विकास कार्य के नाम पर दी। इसके बाद सभी की सहमति से बुधवार को सुबह करीब 11 बजे इस गोशाला में विकास कार्य का शुभारंभ हुआ। हनुमान मित्तल ने बताया कि जैसे-जैसे आमजन से सहयोग मिलता रहेगा, वैसे-वैसे इस गोशाला का विकास कार्य करवा जाएगा।
चारा डालने के लिए नहीं है निर्धारित स्थान : शहर सवाई माधोपुर में गायों के लिए चारा डालने के लिए कोई भी निर्धारित स्थान नहीं है। लोग अपनी स्वेच्छा से ठेले पर से चारा खरीदकर जहां पर गायों का समूह दिखा, वहां पर उन्हें चारा खिला देते है। इससे वहां गायों की भीड़ लग जाने से लोगों को आवागमन में भी परेशानी होती है। यदि गायों को गोशाला में ही चारा खिलाया जाए तो इससे दूसरे राहगीरों एवं वाहनचालकों की परेशानी थोड़ी कम हो सकती है।
सवाई माधोपुर. शहर के हरसहायजी के कटले में मोरचुगा के पास बनी गोशाला में विकास कार्य के तहत खेळ का निर्माण करते श्रमिक।