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मेडिकल रिपोर्ट: तीसरे बाघ से संघर्ष में ही हुई शावकों की मौत, नहीं मिले जहर के निशान

3 वर्ष पहले
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गत दिवस रणथंभौर अभयारण्य के सवाई मानसिंह सेंचूरी के आवंड इलाके में मृत अवस्था में मिले दोनों शावकों का बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया है। पोस्टमार्टम टीम के अनुसार दोनों बाघों की मृत्यु की सर्वाधिक संभावना शवों को देखते हुए किसी बड़े नर बाघ का हमला ही है। वहां प्रथम दृष्टया किसी प्रकार के जहर की कोई संभावना दिखाई नहीं दी है।

पोस्टमार्टम में क्या हुआ खुलासा: दोनों शावकों के पाेस्टमार्टम के लिए वेटनरी के तीन चिकित्सकों की टीम का गठन किया गया था। इस टीम में शामिल डॉ. राजकुमार अग्रवाल, डॉ. सुनील कुमार एवं डॉ. महावीर मथुरिया ने राजबाग चौकी पर पोस्टमार्टम किया। डॉ. राजकुमार ने बताया कि शावकों की उम्र 18 माह के करीब थी। इनका शव 24 घंटे से ज्यादा पुराना था। पेट का विसरा काफी खराब हो चुका था। एक शावक का पेट फटा हुआ था, जो संभवतया किसी दूसरे बाघ से लड़ाई के दौरान फटा हो सकता है। इसी प्रकार दूसरे शावक के शरीर पर भी बहुत सारी चोट एवं घाव थे। इनमें से एक शावक के आगे के पंजे का नाखून टूटा हुआ था, जो मौके पर ही मिल गया। संभवतया यह नाखून दूसरे नर बाघ से लड़ाई के दौरान टूटा हो सकता है।

नहीं मिले जहर के कोई संकेत: डॉ. राजकुमार ने बताया कि वहां कुछ दूरी पर खाया हुआ गोवंश दिखाई दिया था। इस शिकार को दोनों शावकों के साथ संभवतया मां ने भी खाया था। अगर इसमें किसी प्रकार का जहर होता तो मां भी इन शवकों के साथ मौत का शिकार हो जाती। इसी प्रकार शावकों के शरीर न तो कहीं से नीले हुए थे और न ही उनकी जीभ बाहर आई थी। अगर जहर का मामला होता तो शव का नीला होना एवं जीभ का बाहर आना पाया जाता है। यह दोंनो ही चीज इन शवों में नहीं मिली है। इसके बावजूद उक्त शिकार के सेंपल के साथ दोनों शावकों के बिसरे भी लिए गए हैं।

शावकों के शवों का निरीक्षण करती चिकित्सकों की टीम

शरीर के घाव सिद्ध करते हैं कि मौत से पहले हुआ संघर्ष

शवों एवं हालातों को देखते हुए इस बात में कोई संशय दिखाई नहीं दे रहा है कि इन शावकों की मौत किसी तीसरे नर बाघ के हमले से हुई है। कारण यह है कि कभी भी जहर जैसे हालातों में बाघ का पेट इस प्रकार न ही फटता है। साथ ही इस प्रकार की गंभीर चोट के निशान एवं घाव दिखाई नहीं देते हैं। इन शावकों को किसी अन्य जानवर ने भी नहीं खाया था। इस कारण जहर की कोई गुंजाइश नहीं है। फिर भी रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो पाएगा।

सवाई माधोपुर. पोस्टमार्टम के बाद चिता पर रखे गए दोनों शावकों के शव।

सैंपल लेब में भेजे जा रहे हैं

दोनों शावकों का पोस्टमार्टम एक्सपर्ट चिकित्सकों द्वारा किया गया है। राजबाग चौकी पर पोस्टमार्टम के बाद दोनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। पोस्टमार्टम टीम की प्रथम रिपोर्ट के अनुसार इनकी मृत्य किसी तीसरे बाघ के हमले के कारण होने की ही संभावना है। सेम्पल लेब में भेजे जा रहे हैं। उप वन संरक्षक, बीजू जोय

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