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न्यायालय की फटकार के बाद ही खुली सहकारिता विभाग की नींद

3 वर्ष पहले
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कहने को तो सरकारी बेड़े में सहकारिता मंत्रालय वजूद में है और प्रदेश में हजारों कर्मचारी एवं अधिकारियों को इस विभाग में काम करने के लिए सरकार वेतन भी दे रही है। इस विभाग की व्यवस्थाओं को सुचारू रखने के लिए सरकार ने एक मंत्री भी बना रखा है, लेकिन यह सब किसी काम के नहीं है। सही मायने में सरकार ने इस विभाग को पूरी तरह लचर कर पूरे विभाग एवं व्यवस्था की ही कमर तोड़ दी है। जो संस्थाएं सहकारिता की भावना एवं व्यवस्था से चलनी चाहिए थी उनको इस सरकार ने इंस्पेक्टर राज के हवाले कर दिया और नतीजा यह है कि आज जिले की अधिकांश संस्थाएं कंगाल होकर बर्बादी के दिन देख रही है। आखिर अब हाईकोर्ट को ही इसमें तीखे तेवर दिखाने पर और सरकार और मंत्रालय को तीन माह में इन संस्थाओं के चुनाव करवा कर न्यायालय को अवगत करवाने के लिए पाबंद किया है। इसके बाद ही विभाग एवं मंत्री की नींद खुली है और चुनावों के लिए विभाग में सुगबुगाहट दिखाई देने लगी है।

आखिर सरकार क्यों कर रही है ऐसा

राज्य में सहकारिता से जुड़े कुछ लोगों की माने तो यह सरकार हर हाल में सहकारिता के चुनावों बचना चाहती थी। राज्य में सहकारिता ऐसा विभाग है जहां पर सब कुछ चुने हुए बोर्ड के माध्यम से ही होता है। हर निर्णय बोर्ड एवं चुने हुए लोगों द्वारा ही लिया जाता है। यही कारण है कि आपसी सहयोग की भावना से चलने वाले इस विभाग में बोर्ड ही सबसे अहम और निर्णयक होता है। दूसरी तरफ इस सरकार द्वारा सहारिता के चुनाव नहीं करवाने के पीछे कई तर्क दिए जाते हैं। पुराने लोगों की माने तो आज भी सहकारिता के क्षेत्र में कांग्रेसी मानसिकता वाले लोगों का बोल बाला है। इस क्षेत्र में कांग्रेस के लोगों की पकड़ होने के कारण परिणाम वर्तमान सरकार के लिए सुखद संकेत देने की उम्मीद कम होती है। यही कारण है कि यह सरकार हर हाल में इन चुनावों से बचना चाहती थी।

न्यायालय ने ही झकझोरा सरकार को

इस मामले में पूरी तहर आंख मूंद कर बैठी सरकार की आंख खोलने का काम आखिर उच्च न्यायालय को ही करना पड़ा है। मार्च माह में न्यायालय ने सरकार एवं विभाग को तल्ख आदेश देते हुए तीन माह में राज्य की सहकारी संस्थाओं के चुनाव करवा कर न्यायालय को अवगत करवाने के आदेश जारी किए है। ऐसा नहीं होने पर विभाग के अधिकारी एवं मंत्रालय को न्यायालय में उपस्थित होकर जवाब पेश करना पड़ेगा।

हरकत मे आया सिस्टम

न्यायालय के आदेश के बाद अब विभाग में सुगबुगाहट शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार उप रजिस्ट्रार सहकारि समितियां सवाई माधोपुर के कार्यालय में हलचल शुरू हो गई है। प्रथम चरण में 19 नव गठित सहकारी समितियों के चुनाव के लिए मतदाता सूची बनाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके बाद जिले की सभी 135 ग्राम सेवा सहकारि समितियों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इन सभी के चुनाव पूरे होने के बाद, केवीएसएस, भूमि विकास बैंक, उपभोक्ता भंडार, सीसीबी सहित अन्य संस्थाओं के प्रक्रिया शुरू होगी।

चारों ओर अव्यवस्था का आलम

सहकारी संस्थाओं के चुनाव समय पर नहीं होने से भी संस्थाओं नें इंस्पेक्टर राज हो गया है। इनके राज में न तो कोई इन से पूछने वाला है और न ही कोई काम करने वाला। चारों तरफ अव्यवस्था का आलम है। अधिकांश संस्थाएं इंस्पेक्टरों के कारण डूब गई है। कर्मचारियों के वेतन तक का जुगाड़ नहीं है। ज्यादातर कर्ज में डूब कर बंद होने की हालत में। सरकारी एवं निजी काम इनके हाथों से चला गया है। किसान को मिलने वाला फायदा बंद हो गया है।

-हंसराज शर्मा, पूर्व अध्यक्ष केवीएसएस, सवाई माधोपुर

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