जिले में पंचायत राज में हो रहे घोटालों को राजनीतिक दबाव में दबाने का काम बखूबी हो रहा है। सरकारी खजाने से फर्जी तरीके से पैसा उठाने एवं गबन करने वाले लोगों की जांच के बाद दोषी पाए जाने के बावजूद सरकारी तंत्र दोषियों को बचाने के लिए जोर लगा रहा है। उच्च अधिकारी गबन का पैसा सरपंचों एवं गबन करने वाले लोगों से वसूलने एवं कानूनी कार्रवाई करने के लिए जिले के सिस्टम का पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने के लिए कह रहे हैं, लेकिन सत्तासीन नेताओं के दबाव में न तो दोषियों के खिलाफ एफआईआर हो रही है और न ही गबन किया गया सरकारी पैसा वसूलने के लिए कोई कदम उठाया जा रहा है। उल्टा पूरे मामले को दबा कर उस पर बेईमानी एवं घोटाले की खाख डालने का काम जिले में हो रहा है। (शेष पेज 17 पर)
लोगों ने सबसे पहले 10 सितंबर 2017 को पहली शिकायत जिप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं कलेक्टर से की, लेकिन शिकायत को दबा दिया गया। एक माह बाद पंचायतीराज मंत्री राजेंद्र राठौड एवं अतिरिक्त आयुक्त द्वितिय इजीएस अली खान को भी की। वहां से जिला परिषद के सीईओं को जांच के लिए दो अधिकारियों पंचायत प्रसार अधिकारी जि.प. समा कैलाश बैरवा एवं भगवान सहाय बैरवा सहायक अभियंता को नियुक्त किया गया।
नरेगा मामले की जांच में भी आनाकानी
जांच में घाेटालेबाजों के नाम सामने आने के बाद भी दबा दिया गया पूरा मामला, तीन माह पूर्व जारी एफआईआर के आदेश भी धूल चाट रहे हैं किसी कोने में
हीरापुर में मनरेगा के तहत बनी टूटी फूटी सड़क।
सरपंच मक्खन लाल मीना निकालता रहा पैसा
ग्रामीणों ने जिला परिषद एवं कलेक्टर को दी शिकायत में बताया कि वर्ष 2013 में गांव का सरपंच मक्खन लाल मीना था। उस समय उसके पास मनरेगा के तहत जारी मस्टररोल में काम करने वाले श्रमिकों में नाहर सिंह मीना पुत्र बद्रीलाल मीना का नाम भी शामिल था। इसी दौरान 4 अक्टूबर 2013 को नाहर सिंह की मृत्यु हो गई। लेकिन सरपंच एवं सचिव के पास मस्टररोल के रिकार्ड में मरा हुआ नहार सिंह मीना बतौर श्रमिक काम करता रहा। आलम यह था कि मरने के बाद भी नाहर सिंह द्वारा किए गए काम का भुगतान उसके एवं उसकी प|ी के ज्वॉइंट खाते में जमा होता रहा और वह पैसा लगातार खाते से निकलता रहा।
गंगापुर सिटी की ग्राम पंचायत हीरापुर का मामला
हेमा ने जेठ मक्खन से भी आगे निकल कर काम किया
कुदरत की व्यवस्था में नाहर सिंह की मृत्यु 4 अक्टूबर 2013 को हो चुकी थी। उसका संसार में कही कोई वजूद नहीं था, लेकिन भ्रष्ट तंत्र में वह फिर भी जिंदा रहा। सरपंच मक्खनलाल मीना का कार्यकाल पूरा हो गया और उसके छोटे भाई की प|ी हेमा मीना जनवरी 2015 में नई सरपंच बन गई। हेमा ने सरपंच बनने के बाद अपने जेठ मक्खन से भी आगे निकल कर काम किया और उसने मरे हुए नाहर सिंह को श्रमिक की सूची से हटा कर मेट बना दिया और मनरेगा के काम उसकी निगरानी में होने लगे। नाहर सिंह न तो इस दुनिया में था लेकिन वह घोटालों के कागजों में जिंदा था और सरपंच एवं दूसरे लोगों द्वारा किए जा रहे घोटालों में मरने के बाद भी शामिल था। सरकारी तंत्र मरे हुए आदमी द्वारा किए गए काम का भुगतान उसके खाते में जमा करवा रहा था। जिसे तथा कथित रूप से उसकी प|ी निकलवा कर गबन में शामिल हो रही थी।
जांच कमेटी ने दी रिपोर्ट
जांच कमेटी ने पूरे मामले की जांच के बाद अपनी जांच रिपोर्ट 13 दिसंबर 2017 को सीईओ को प्रस्तुत कर दी। जिस में पूरे घोटाले को साफ करते हुए जांच कमेटी ने घोटाले की बात अधिकारियों के सामने रख दी।
एक और घोटाला जिसे दबा दिया गया
गंगापुर सिटी पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत हीरापुर में पिछले कई साल से घोटालों का खेल चल रहा है। सरपंच वर्तमान हो या पूर्व सीधे तौर पर उसमें शामिल होने के प्रमाण जिला परिषद को ग्रामीणों ने दिए। प्रमाणों के आधार पर जिला परिषद की टीम ने जांच की और जांच में वर्तमान एवं पूर्व सरपंच पर लगाए गए आरोप सही पाए गए। जांच में पाया गया कि सरपंच ने जो व्यक्ति मर चुका है उसे कागजों में मेट दिखाया और उस मरे हुए व्यक्ति की निगरानी में काम होना बताया। घोटाले की पोल जब खुली जब मरे हुए आदमी द्वारा किए गए फर्जी काम का भुगतान उसके खाते में जमा करवा कर उसकी प|ी के नाम से पैसा भी निकाल लिया गया।