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बिजली निगम प्रीपेड हटाकर लगा रहा साधारण मीटर, वजह- कंपनी का टेंडर पूरा, रिचार्ज प्रक्रिया कठिन

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | सवाई माधोपुर

बिजली निगम द्वारा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी कार्यालयों एवं स्कूलों में प्रीपेड मीटर लगाए थे, जिससे सरकारी संस्थानों से बिजली बिल उपभोग का रेवेन्यू एडवांस मिल सके, लेकिन अब कई कारण बता कर बिजली निगम ने इन मीटरों से सरकारी विभागों को मुक्ति देने की शुरुआत कर दी है। ऐसे में निगम द्वारा सबसे पहले सरकारी विभागों में लागू की गई प्रीपेड मीटरों की योजना अब लगभग बंद होने की तरफ अग्रसर है।

पिछले दो वर्ष पूर्व बिजली निगम द्वारा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सरकारी कार्यालयों एवं स्कूलों में प्रयोग के लिए करीब 142 प्रीपेड मीटर लगाए गए थे, जिससे इन कार्यालयों से लंबे बकाया चल रहे रेवेन्यू की समस्या नहीं रहे। प्रीपेड मीटर से निगम को समय समय पर बिजली उपभोग का रेवेन्यू मिलने लगा था, लेकिन मीटर लगाने के बाद इनको रिचार्ज करवाने की प्रक्रिया को जटिल बताया जाने लगा।

नया कदम

दफ्तरों-स्कूलों में बकाया बिल राशि वसूलने में आ रही समस्या दूर करने के लिए लगाए थे मीटर

ये दिए जा रहे हैं तर्क

इन मीटरों को हटाने के पीछे कई तर्क दिए जा रहे हैं। एक तर्क यह है कि प्रीपेड मीटर लगाने एवं उनकी तकनीकी खराबी को सुधारने वाली कंपनी का टेंडर पूरा हो गया है। ऐसे में प्रीपेड मीटरों की तकनीकी खराबी सुधारने वाले कार्मिकों उपलब्ध नहीं होने एवं रिचार्ज की जटिल प्रक्रिया को लेकर कई सरकारी कार्यालयों से इन मीटर को हटाकर वापिस पुराने मीटर लगाने की मांग की जा रही थी। इनके हटने से सरकार सरकारी कार्यालयों से बकाया रहने वाली राशि को एडवांस लेने का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।

एक पहलू यह भी : सरकारी दफ्तरों में रहने लगी थी बिजली गुल

बिजली निगम एवं सरकारी दफ्तरों के अधिकारियों द्वारा इसके पीछे चाहे जो तर्क दिया जाए, लेकिन यह बात भी साफ है कि न तो सरकारी दफ्तरों से समय पर इसके लिए भुगतान होता था और न ही कोई जिम्मेदारी लेकर इस काम को ईमानदारी से करना चाहता था। ऐसे में कई कई दिनों तक अपनी ही लापरवाही एवं लेटलतीफी के कारण दफ्तरों की बिजली गुल रहने लगी थी। संबंधित विभागों के अधिकारी अंधेरे में बैठ कर काम करने में अपनी तौहीन महसूस करने लगे थे। इन विभागों द्वारा बिजली निगम पर इन मीटरों को हटा कर पुराने ढर्रे वाले मीटर लगाने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा था।

अन्य कोई चारा नहीं : बिजली निगम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बिजली निगम ने प्रीपेड मीटरों को लगाने तथा उनमें रिचार्ज का टोकन जनरेट करने, मीटरों की रिपेयर करने सहित अन्य कई तकनीकी कार्यों का टेंडर एक निजी कंपनी को दिया हुआ था। तीन महीने पूर्व उक्त कंपनी का टेंडर समाप्त हो गया है। इससे मीटरों में खराबी आने पर निगम के पास उनको बदलकर साधारण मीटर लगाने के अलावा कोई चारा नहीं है। ऐसे में प्रीपेड मीटर लगाकर सरकारी दफ्तरों के बिजली बिलों के बकाया चलने वाली राशि को एडवांस में लिए जाने की योजना असफल होती दिखाई दे रही है।

प्रीपेड मीटर में तकनीकी खराबी

नए प्रीपेड मीटर किसी भी कार्यालयों में नहीं लगाए जा रहे हैं। पुराने लगे प्रीपेड मीटरों में तकनीकी खराबी आने पर उनकी जगह पुरानी बिल वाला मीटर ही लगाया जा रहा है। सतीश अग्रवाल, अधिशाषी अभियंता, बिजली निगम

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