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रास्ते की जमीन पर लठैतों के दम पर निर्माण बीडीओ बोले- पुलिस नहीं कर रही सहयोग

3 वर्ष पहले
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उपखंड मुख्यालय पर एक रास्ते की जमीन पर अतिक्रमण के मामले में कानून की पालना नहीं की जा रही हैं। अतिक्रमी लठैतों के दम पर दिन दहाड़े रास्ते की जमीन पर निर्माण कर रहा है। पीडि़त पक्ष की सूचना पर ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी एवं पंचायत समिति के विकास अधिकारी ने पुलिस से सहयोग की मांग की, लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन भी मौन साधे हुए हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि नियम विरुद्ध किए जा रहे अतिक्रमण रुकवाने को लेकर कलेक्टर ने विकास अधिकारी को फोन करके अवैध निर्माण कार्य रुकवाने का निर्देश दिया, मगर स्थानीय पुलिस पंचायत समिति के विकास अधिकारी के बुलाने पर भी मौके पर नहीं आयी। इस प्रकरण में एक मारपीट का मामला भी सायला थाना मे दर्ज हो चुका है। मौके पर दो पक्षों के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो चुकी है, फिर भी पुलिस गंभीरता से नहीं ले रही है।

यह है मामला

गौरतलब है कि प्रार्थी कांतिलाल पुत्र हिमताराम जैन की रिपोर्ट पर ग्राम पंचायत सायला ने कार्यवाही करके रास्ते पर किया गया अतिक्रमण चार माह पहले हटाया था। अतिक्रमण हटाने से पूर्व अतिक्रमी को अपना पक्ष रखने के लिए दो बार समय भी दिया गया था। इसके बाद वार्डपंचों की मौका निरीक्षण रिपोर्ट, पटवारी की रिपोर्ट, गवाह के बयान एवं ग्राम पंचायत की बैठक में लिए गए निर्णयानुसार राजस्थान काश्तकारी अधिनियम की धारा 251के तहत प्रार्थी की खातेदारी भूमि में आवागमन का बंद किया गया रास्ता खुलवाया गया था। साथ ही रास्ते पर छीणो की पट्टियों का अतिक्रमण भी हटा दिया था। जिसके बाद अतिक्रमी ने ग्राम पंचायत के निर्णय के खिलाफ कलेक्टर, जिला परिषद, पंचायती राज मंत्री जयपुर व लोकायुक्त राजस्थान को भी शिकायत की।

लेकिन सभी जांचों मे ग्राम पंचायत की कार्रवाई सही पाये जाने पर अतिक्रमी को कोई राहत नहीं मिली। इस पर अतिक्रमी ने कानून को हाथ मे लिया तथा किराये के बदमाश बुलाकर गत दो दिनों से रास्ते पर निर्माण कार्य शुरू करवा दिया। जिससे गांव में अशांति का वातावरण बना हुआ है।

बीडीओ बोले- पुलिस का सहयोग नहीं मिल रहा है

कलेक्टर के फोन पर निर्देशानुसार मौके पर जाकर मैंने अवैध निर्माण कार्य रुकवाने का प्रयास किया, लेकिन अतिक्रमी नहीं माने। वहीं पुलिस का सहयोग नहीं मिलने से निर्माण कार्य नहीं रुका। उपखंड अधिकारी का भी पुलिस इमदाद भेजने के लिए पत्र भी भेजा है, इसके बावजूद पुलिस का नहीं आना अनुचित है। -छोगाराम विश्नोई, विकास अधिकारी, सायला

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