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जब धर्म पर प्रहार होता है तब भगवान अवतार लेते हैं

3 वर्ष पहले
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भगवान श्रीकृष्ण जन्म पर नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की सहित कई भजनों की प्रस्तुति दी

भास्कर संवाददाता| सीहोर

जब-जब धर्म पर प्रहार होता है तो भगवान स्वयं किसी न किसी रुप में अवतार ले लेते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने भी कंस के अत्याचार को खत्म करने अवतार लिया था। यह बात भोपाल नाका मुरली में चल रही सात दिवसीय भागवत कथा में पंडित नरेंद्र नागर ने कही।

पंडित नागर ने कथा में आगे कहा कि जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो अपने आप जेल के ताले खुल गए और वासुदेव की बेड़ियां खुल गई। वासुदेव कान्हां को एक टोकरी में लेकर यमुना नदी को पार कर यशोदा मां और नंदलाल के पास छोड़ जाते हैं। इसकी कंस को खबर नहीं लग पाती है। पंडित नागर ने भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल में आनंद भयो जय कन्हैया लाल की सहित कई भजनों की प्रस्तुति दी। इस बीच श्रद्धालु उत्साहित होकर नृत्य कर रहे थे। कथा के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव मनाया। साथ ही महाआरती कर माखन मिश्री का प्रसाद वितरण किया।

अज्ञानता का पर्दा अंधकार की तरफ ले जाता है

पंडित श्री नागर ने कहा कि मनुष्य पर अज्ञानता का पर्दा चढ़ा होने से उसको अच्छे और बुरे का कोई विचार नहीं रहता है। मनुष्य मन, वचन और कर्म से असत्य कार्य करता है। जिनका मन निर्मल होता है अर्थात मन, वाणी और कर्म से जो एक होते हैं, जो अंदर और बाहर से एक हैं। वह ही भगवान को प्राप्त करते हैं।

आयोजन समिति व पार्षद विजेंद्र परमार ने बताया कि मुरली में कथा दोपहर 12 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलती है। कथा का समापन 17 अप्रैल को होगा।

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