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पिता ही पुत्री के साथ अपराध करे, तो अन्य व्यक्ति के संरक्षण में बालिका के सुरक्षित रहने की परिकल्पना भी नहीं कर सकते

3 वर्ष पहले
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जहां पिता ही पुत्री के साथ ऐसा घृणित यौन अपराध कारित करे, तो अन्य व्यक्ति के सरंक्षण में ऐसी अल्प आयु बालिका के सुरक्षित रहने की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती है। ऐसी स्थिति में ऐसे यौन विकृत मानसिकता वाले व्यक्ति को कम से कम सजा देने से दंडित किया जाना न्योचित प्रतीत नहीं होता है। यह बात 11 साल की बेटी के साथ दुष्कृत्य के आरोपी पिता को 15 साल की सजा सुनते हुए नसरुल्लागंज के द्वितीय अपर सत्र अवधेश कुमार सिंह ने फैसले में लिखी।

न्यायाधीश श्री सिंह ने रिश्ते को कलंकित करने वाले पिता को अपनी बेटी के साथ ज्यादती का दोषी पाते हुए 15 साल के सश्रम कारावास और एक हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। शासन की ओर से पैरवी अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी देवेन्द्र सिंह ठाकुर ने की।

पिता ने दी थी बेटी को मां को मार डालने की धमकी, बेटी ने दादा और मां के साथ जाकर दर्ज कराई थी रिपोर्ट

अभियोजन के अनुसार 1 अगस्त 2016 की रात को नसरुल्लागंज थानांतर्गत गांव लाचौर निवासी एक व्यक्ति ने अपनी 11 वर्षीय कक्षा चार में अध्यनरत बेटी को खाना देने के लिए कहा। जब बेटी अपने पिता को खाना देने पहुंची तो पिता ने उसे अनैतिक कार्य के लिए विवश किया। पिता ने धमकी दी कि यदि ऐसा नहीं करोगी तो मैं तुम्हारी मां को मार डालूंगा। पिता के जबरदस्ती करने पर वो भाग कर अपने दादा दादी के पास पहुंची। इस बात का जब उसकी मां ने विरोध करने की कोशिश की तो उसके साथ मारपीट की। 3 अगस्त को दादा और माता के साथ नसरुल्लागंज थाने पहुंच कर बेटी ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि उसके पिता ने आज मां के साथ जमकर मारपीट की। उसके बाद जब मां सो गई तो मुझसे गलत कार्य कराया।

अर्थ दंड नहीं देने पर दो माह की सजा के आदेश

नसरुल्लागंज पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में प्रकरण दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया। जहां सुनवाई के दौरान नसरुल्लागंज के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह ने आरोपी पिता को दोषी पाते हुए 15 वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड नहीं देने की स्थिति में दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश दिया गया है।

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