84 लाख जीवों में भटकने के बाद मनुष्य शरीर प्राप्त हुआ
पूर्णाहुति के बाद भागवत कथा का हुआ समापन।
भास्कर संवाददाता | सीहोर
शहर के मुरली क्षेत्र में जारी सात दिवसीय भागवत कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र का वर्णन किया गया। कथा के समापन अवसर पर पूर्णाहुति दी गई। मंगलवार को पंडित नरेंद्र नागर ने कहा कि 84 लाख जीवों में भटकने के बाद मनुष्य का शरीर मिलता है। इसे व्यर्थ न जाने दें।
उन्होंने आगे कहा कि समय रहते यदि परमात्मा का सुमिरन नहीं किया तो पीछे पछताना पड़ेगा। सुदामा चरित्र की कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण सांदीपनी आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं। यहां उनकी सुदामा से मित्रता होती है। सच्ची मित्रता वही है जो आवश्यकता पड़ने पर मित्र के काम आ सकें। पंडित नागर ने आगे कहा कि भागवत कथा हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। पंडित श्री नागर ने कहा कि यदि हम कथा का कुछ अंश ही अपने जीवन में गृहण कर परमार्थ का कार्य करेंगे तो यह मनुष्य जीवन सफल हो जाएगा। कथा के समापन अवसर पर यजमान सहित श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति दी। इस मौके पर जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष उषा सक्सेना, पूर्व जिपं अध्यक्ष जसपाल सिंह अरोरा, तुलसी पटेल, कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष कमलेश कटारे, नंद किशोर परमार, गजराज परमार, बाबूलाल परमार, पार्षद विजेंद्र परमार, जुझार सिंह पटेल, बलवंत सिंह, गेंदलाल परमार, हरि नारायण परमार आदि उपस्थित थे।