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पिता चाय बेचकर मुझे पढ़ाते हैं, 45 अंक देकर पास कर देना

3 वर्ष पहले
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बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में कॉपी जांच रहे परीक्षकों के सामने बड़े ही रोचक मामले आए हैं। विद्यार्थी अलग-अलग बहाने बनाकर पास करने करने की मनुहार कर रहे हैं, वहीं विद्यार्थी पास करने के लिए धमकी भी दे रहे हैं।

अधिकांश विद्यार्थी गरीबी की दुहाई देकर पास करने की बात कह रहे हैं। 10 वीं के एक छात्र ने तो यह भी बताया कि उसके पिताजी चाय बेचकर उसे पढ़ा रहे हैं। उसमें परीक्षा में 45 नंबर मांगे हैं। उत्कृष्ट उमावि में बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन का दूसरा चरण चल रहा है। यहां 10वीं की कॉपियां तो पूरी चेक हो चुकी हैं, लेकिन 12वीं की परीक्षा का मूल्यांकन चल रहा है। 10वीं कक्षा के एक विद्यार्थी ने सामाजिक विज्ञान की कॉपी में लिखा है कि उसके पिताजी चाय बेचते हैं। यदि वह पास नहीं हुआ तो उसकी बहुत पिटाई लगेगी। यही नहीं विद्यार्थी ने लिखा है कि प्लीज मुझे कम से कम 45 अंक जरूर दे दें। 12वीं कक्षा के समाजशास्त्र में कॉपी जांचते समय एक छात्रा ने लिखा है कि वह पढ़ना चाहती है, लेकिन पढ़ाई नहीं कर पाई। मुझे प्लीज पास कर देना। केमिस्ट्री की कॉपियों में इस तरह के पत्र सबसे ज्यादा मिले हैं। 12वीं केमेस्ट्री में करीब 7 विद्यार्थियों ने इस तरह के पत्र लिखकर खुद को पास करने की गुहार लगाई है। परीक्षा कार्य में लगे परीक्षकों ने बताया कि हर साल इस तरह की चिट्ठियां बच्चे लिखते हैं। मूल्यांकन केंद्र प्रभारी एवं एक्सीलेंस स्कूल के प्राचार्य रविंद्र कुमार बांगरे ने बताया कि परीक्षा के दौरान कई बार तो बच्चे पास करने के लिए बहुत ही अजीब-गरीब बहाने बनाते हैं। हालांकि मूल्यांकन पूरी तरह नियमानुसार किया जाता है।

मूल्यांकन

बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में विद्यार्थियों ने खुद को पास करने के लिए लिखे, तरह-तरह के बहाने

24 पेज की कॉपी भरी, हर पेज पर जय माता दी

12वीं की केमेस्ट्री की कॉपी जांचते समय एक कॉपी ऐसी भी आई, जिसमें विद्यार्थी ने हर प्रश्न के उत्तर में जय माता दी लिखा है। मूल्यांकनकर्ता के अनुसार इस विद्यार्थी ने उत्तर पुस्तिका के पूरे 24 पेज भरे हैं। जिसमें हर प्रश्न के सामने उत्तर में जय माता दी... जय माता दी... लिखा है।

मूल्यांकन अंतिम दौर में

मूल्यांकन का काम अंतिम दौर में चल रहा है। कुछ विषयों का मूल्यांकन पूरा हो चुका है, जबकि जहां मूल्यांकन धीमा चल रहा है, वहां से भी अतिरिक्त कॉपियां आई हैं। मूल्यांकन में पूरी तरह से सख्ती बरती जा रही है। -रविंद्र कुमार बांगरे, प्राचार्य उत्कृष्ट उमावि एवं मूल्यांकन केंद्र

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