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सुरक्षित रखनी थीं किताबें पर कहीं छत की सीलिंग लटक रही कहीं टूटी हैं खिड़कियां, जिम्मेदारों ने दे दिया सुरक्षित प्रमाण पत्र

3 वर्ष पहले
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शासकीय स्कूलों में दी जाने वाली अधिकतर निशुल्क किताबें आ चुकी हैं। किताबों को सुरक्षित जगह रखने से पहले उस जगह का एक सुरक्षा प्रमाण पत्र मांगा गया था। सभी ने प्रमाण पत्र भी दे दिए लेकिन जहां किताबों को रखा है, वहां पर न तो अग्निशामक यंत्र है और न ही पानी और रेत से भरी बाल्टियां। जहां पर ये किताबें रखी हैं वहां पर कहीं छत की सीलिंग लटक रही है तो कई जगह खिड़कियां टूटी हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों को कोई चिंता नहीं है। गलत प्रमाण पत्र देकर कहीं पर भी किताबों को रखवा दिया गया है।

जिले स्कूली बच्चों को निशुल्क किताबों का वितरण किया जाता है। हर साल बच्चों को ये किताबें राज्य शिक्षा केंद्र भेजता है। स्कूल खुलने के समय इन किताबों का वितरण किया जाना है। इस बार जिलेभर के स्कूलों के लिए मांग के अनुसार एक लाख 9 हजार 924 किताबें आना हैं। इनमें से 85 फीसदी किताबें आ चुकी हैं जिन्हें सभी विकासखंडों में भेजा गया है। इन किताबों को रखने से पहले सभी जिम्मेदारों से सुरक्षित प्रमाण पत्र मांगा गया था कि जहां इन्हें रखा जाना है, वहां पर सुरक्षा के पूरे इंतजाम हों, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सभी ने प्रमाण पत्र तो दे दिए लेकिन सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। डीपीसी अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि सभी बीआरसी को सुरक्षा के मापदंडों का पालन करते हुए किताबों को सुरक्षित रखवाना था। यदि कहीं पर ऐसा नहीं हुआ है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अभी 85 प्रतिशत किताबें सभी विकासखंडों में पहुंच चुकी हैं, शेष आना बाकी

बिना सुरक्षा इंतजाम किए रख दी किताबें।

कितनी आना हैं किताबें

आष्टा विकासखंड 24965

बुदनी विकासखंड 12796

इछावर विकासखंड 16846

नसरुल्लागंज विकासखंड 24776

सीहोर विकासखंड 30541

कुल योग 109024

सुरक्षा के लिए ये होने थे इंतजाम

जहां पर किताबों को रखा जाना है वहां पर अग्निशमन यंत्र को रखा जाना जरूरी है।

पानी से भरी बाल्टियां रखना जरूरी था।

रेत कीबाल्टियों को भी रखा जाना था।

जहां पर किताबों को रखा है, वहां पर ये भी देखना था कि कहीं खुले तार न पड़े हों।

छत की सीलिंग लटक रही और नीचे रख दीं किताबें

सीहोर विकासखंड में 30 हजार 541 किताबें आना हैं। इनमें से 22 हजार के करीब आ चुकी हैं। इन सभी किताबों को शासकीय महिला पॉलीटेक्निक छात्रावास भवन में रखा गया है। जहां पर इन किताबों को रखा गया है उस कमरे की सीलिंग भी लटकी हुई है और नीचे किताबों को रख दिया है। यहां पर न तो कहीं अग्निशामक यंत्र है और न ही पानी या रेत से भरी बाल्टियां। बस किताबों को रख दिया और रखने से पहले प्रमाण पत्र भी दे दिया कि जहां इन किताबों को रखा जा रहा है, वहां पर सुरक्षा के सभी इंतजाम कर दिए गए हैं।

लैब के कक्ष में ही रख दीं किताबें

नसरुल्लागंज में हायर सेकंडरी स्कूल के मिडिल विभाग में इन किताबों को रखा गया है। किताबों को रखने के लिए यहां पर लैब के कक्ष को चुना गया है। हालांकि सुरक्षा के लिए यहां पर एक अग्निशमन यंत्र रखा है और पास में रेत से भरी बाल्टियां भी, लेकिन खास बात यह है कि इस कमरे की खिड़कियां ही क्षतिग्रस्त हैं। इसके बाद भी इस कक्ष में इन किताबों को अंदर रख दिया गया। यहां से भी सुरक्षा का प्रमाण पत्र जारी किया गया है।

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