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समझ बढ़ाने स्कूल में बच्चों से कराएंगे प्रोजेक्ट वर्क

3 वर्ष पहले
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सरकारी स्कूलों के शिक्षक अब पुराने तरीकों से बच्चों को नहीं पढ़ा पाएंगे। नए सत्र से बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों को भी पढ़ाई के पुराने पैटर्न में बदलाव कर प्रोजेक्ट वर्क पर फोकस करना होगा। प्रोजेक्ट बेस्ड कोर्स होने से हर विषय को बच्चे आसानी से समझ और सीख पाएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग शिक्षकों को पढ़ाई की नई तकनीक सिखाने के लिए ट्रेनिंग दे रहा है। इसके तहत सीहोर जिले के 8 शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए भोपाल भेजा गया था। अब वे अन्य शिक्षकों को ट्रेनिंग दे रहे हैं।

एक समान शिक्षा नीति लागू करने की कवायद के तहत नए सत्र से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पुराने कोर्स की जगह अब एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) का कोर्स पढ़ाया जाएगा। भोपाल में 21 से 26 मई तक गणित और विज्ञान विषय की ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग लेकर आए शिक्षक अन्य शिक्षकों को ट्रेनिंग देंगे। इसमें गणित के 14 और विज्ञान के 11 शिक्षक ट्रेनिंग के लिए गए हैं।

नया शिक्षा सत्र

सरकारी स्कूलों में लागू होगा एनसीईआरटी कोर्स, प्रोजेक्ट वर्क पर रहेगा फोकस

प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों को मिलेगी मदद

सरकारी स्कूल के बच्चे भी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार रहेंगे क्योंकि परीक्षा में ज्यादातर सवाल एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से जुड़े होते हैं। इसीलिए एनसीईआरटी की किताबों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। चाहे सिविल सेवा की परीक्षा हो या अन्य कोई परीक्षा, सभी में सवाल एनसीईआरटी की बुक्स से पूछे जाते हैं।

मप्र पाठ्य पुस्तक निगम में छपेंगी किताबें: सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी के कोर्स की किताबों की छपाई और निशुल्क वितरण का काम मप्र पाठ्य पुस्तक निगम ही करेगा। मप्र शासन की ओर से राज्य शिक्षा केंद्र, एनसीईआरटी और निगम के बीच अनुबंध प्रक्रिया को जल्द पूरा करने को कहा गया है।

सीबीएसई-एमपी बोर्ड की पढ़ाई होगी समान

एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू होने से सीबीएसई और एमपी बोर्ड की पढ़ाई में कोई अंतर नहीं रहेगा। अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम से प्रश्न पूछे जाते हैं। समान कोर्स होने से बच्चों को दिक्कत नहीं होगी। देशभर में अगर समान शिक्षा लागू होती है तो बच्चों की समस्याएं खत्म हो जाएंगी। एसपी त्रिपाठी, डीईआे सीहोर

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