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स्वयं सेवकों के सर्वे में जहांगीरपुरा के घरों में शौचालय नहीं मिले, बाहर जा रहे लोग, पानी की भी हो रही दिक्कत

3 वर्ष पहले
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आरएके कृषि महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के छात्रों ने घर-घर जाकर स्वच्छता सर्वे किया। जहांगीर पुरा गांव में स्वयं सेवकों ने लोगों से स्वच्छता संबंधी जानकारी ली। इसमें कुछ घरो में शौचालय नहीं है। वहीं जिनके घर शौचालय है वहां या तो सेप्टिक टैंक भर गया है या फिर पानी के अभाव में शौचालय का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। आरएके कॉलेज के एनएसएस इकाई के छात्र-छात्राएं स्वच्छ भारत ग्रीष्म कालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत 1 मई से 31 जुलाई तक स्वच्छता पर कार्य कर रहे हैं। जहांगीरपुरा गांव में भारत सरकार पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय नई दिल्ली व रासेयो के बैनर तले रासेयो कार्यक्रम अधिकारी डॉ. डीके रैदास के मार्गदर्शन में विद्यार्थी सर्वे कर रहे हैं। इस दौरान स्वयं सेवक छात्रों ने घर-घर जाकर सर्वे किया। इस दौरान गांव में गंदे पानी की निकासी व कचरे के प्रबंधन के लिए कुछ व्यवस्था नहीं है। गांव में अधिकतर लोगों के घरों में शौचालय है। जबकि कुछ परिवारों के यहां अभी भी शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है। सर्वे टीम में स्वयं सेवक रासेयो छात्र नायक घनश्याम बामनिया, राहुल पहाड़े, हिमांशी कुशवाह, चंद्रपाल राजपूत, जया मिश्रा, अलका धारवंत, जीवन राठौर, करिश्मा लोधी, रिंकी राय आदि शामिल हैं।

शौचालय में रखे कंडे, बांध रहे बकरी : स्वयं सेवकों का कहना है कि सर्वे के दौरान जब लोगों के घर जाकर देखा तो आश्चर्य जैसी स्थिति देखने को मिली। इसमें कुछ लोग ऐसे मिले जिनके घर शौचालय का उपयोग गोबर के कंडे रखने के लिए किया जा रहा है। कहीं बकरियां बांधी जा रही है। इसके अलावा कुछ परिवारों ने बताया कि उनके शौचालय का सेप्टिक टैंक भर गया है।

पानी की समस्या होने से नहीं कर पा रहे शौचालय का उपयोग : स्वयं सेवकों ने जिन लोगों के घरो में शौचालय बने हैं। इसके बाद भी वह परिवार उसका उपयोग नहीं कर रहा है। इसके बारे में जानकारी ली। इस पर लोगों ने बताया कि गांव में पानी की समस्या होने के कारण शौचालय का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। वहीं कई सेप्टिक टैंक भर चुके हैं। इसके कारण मजबूरी में बाहर शौच के लिए जाना पड़ रहा है। गांव में तालाब के पास स्थित एक हैंडपंप ही सहारा है। यहीं से ग्रामीण पानी लेकर आते हैं।

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