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कचरा जलाने में जले कटंग बांस, दमकलों से आग बुझाने में खर्च कर दिया 11,500 लीटर पानी

3 वर्ष पहले
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ऑफिसर्स कॉलोनी के डीएफओ निवास के सामने वन विभाग के कर्मचारी सुबह करीब 11 बजे कचरा जला रहे थे। उनकी लापरवाही से भड़की आग ने आसपास के करीब 24 बांसबेड़े को अपनी चपेट में ले लिया। तेजी से फैल रही इस अाग को तीन दमकलों की मदद से 11 हजार 500 लीटर पानी खर्च कर काबू पाया। इन दिनों शहर में जलसंकट के कारण पांच दिन में पानी मिल पा रहा है। आग बुझाने में खर्च किए गए पानी से करीब 4 कॉलाेनियों को जल सप्लाई हो सकती थी।

कॉलोनी एवं आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे वन विभाग के कर्मचारी कचरे पर आग लगा रहे थे। तभी अचानक आग भड़की और 10 मिनट के अंदर पूरे बांसबेड़े उसकी चपेट में आ गए। इसके बाद सूचना मिलने पर तीन फायर ब्रिगेड बारी-बारी से पहुंचीं और आग पर काबू पाया।

बार-बार लग रही आग, आसपास के घरों को रहता है खतरा : प्राचीन कटंग बांसबेड़े में पिछले दो माह में करीब 6 बार आग लग चुकी है। अभी तक ठोस कारणों का पता नहीं चल सका है। इससे आसपास के लोग आए दिन आग की घटना से परेशान रहते हैं। बड़ियाखेड़ी निवासी राकेश राठौर ने बताया कि आग की घटना से स्थानीय लोगों को काफी परेशानी होती है।

वन कर्मचारियों की लापरवाही: पांच दिन छोड़कर हो रही शहर में जल सप्लाई, इतने पानी से 4-5 कॉलोनियों में होती आपूर्ति

कर्मचारियों ने कहा किसी ने फेंकी बीड़ी, चिंगारी से लगी आग

घटना स्थल पर मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि बांसबेड़े में आसपास के स्थानीय लोग शौच के लिए आते हैं। इस दौरान बीड़ी सिगरेट पीकर छोड़ देते हैं। इसका असर बांसबेड़े में आए दिन आगजनी की घटना हो रही है। जिन्हें हम देख लेते हैं उन्हें टोकते हैं।

डीएफओ निवास के सामने 24 बांसबेड़े जले, एक घंटे में दकमलों की मदद से पाया काबू

रिहायशी एरिया है, सफाई करते हैं

रिहायशी एरिया है कर्मचारी सफाई कर रहे होंगे, लेकिन कचरा जलाते समय सावधानी बतरनी चाहिए थी। इस तरह की घटना पर अंकुश लगाया जाएगा। -रमेश गवाना, डीएफओ सीहोर

पतझड़ में गिरे पत्तों का लगा है ढेर, जरा सी चिंगारी से भड़क सकती है आग, सफाई जरूरी

बांस बेड़े में कचरे का अंबार है। यहां कटंग बांसों से पतझड़ के दौरान पत्ते जमीन पर गिर गए हैं। इससे पूरे बांसबेड़े में इस कचरे का अंबार लगा हुआ है। इसके कारण एक छोटी सी चिंगारी भी इस बांसबेड़े गिरती है तो पूरा बांसबेड़ा जल जाता है। इस कचरे की सफाई कर आए दिन हो रही आग की घटनाओं को रोका जा सकता है। वहीं आसपास के लोगों को भी इस बांसबेड़े में प्रवेश करने से रोका जाए। इससे हो रही आग की घटनाओं को रोका जा सकता है।

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