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बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का सिस्टम बना ताे 11 दिन बाद छाए बादल, हुई बूंदाबांदी

3 वर्ष पहले
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बंगाल की खाड़ी का सिस्टम एक बार फिर सक्रिय हुआ है। कम दबाव के एंटी क्लॉक वाइज सिस्टम बनने के कारण मंगलवार को शाम के समय बूंदाबांदी के साथ हल्की फुहार गिरी। जिले में 27 जुलाई के बाद से बारिश नहीं हुई थी। सावन महीना लगने के बाद पहली बार मंगलवार शाम 5 बजे बूंदाबांदी शुरु हुई। करीब 15 मिनिट बाद हल्की फुहारें शुरु हुई। करीब 10 मिनिट तक हल्की फुहारें गिरी। मौसम विभाग ने अभी दो दिन और हल्की बारिश की संभावना जताई है।

मौसम विशेषज्ञ डॉ. सत्येंद्र सिंह तोमर ने बताया कि अगले दो दिनों तक घने काले बादल छाए रहेंगे। लेकिन तेज बारिश नहीं होगी। उन्होंने बताया कि दो दिन तक तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश होगी। दो दिन में करीब 1 इंच बारिश की संभावना है। जबकि हवाओं की रफ्तार 11 से 18 किमी तक रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार ऐसा बंगाल की खाड़ी में कम दबाव वाला क्षेत्र तैयार होने से हुआ है। बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद यह मध्यप्रदेश से आगे बढ़ेगा। इस साल भी सामान्य तक बारिश का आंकड़ा पहुंच जाएगा। अभी जिले में 62.5 सेमी औसत बारिश रिकार्ड हो चुकी है। जबकि जिले की सामान्य औसत बारिश 114.8 सेमी मानी गई है।

सावन के महीने में इस सीजन में पहली बार गिरी फुहार, दो दिन और तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश की संभावना

अब तक 62.5 सेमी बारिश

जिले की सामान्य औसत बारिश 114.8 सेमी है। जबकि अब तक जिले में 62.5 सेमी बारिश हो चुकी है। पिछले साल अब तक 47.1 सेमी बारिश रिकार्ड हुई थी। इस साल जिले में सबसे ज्यादा बारिश सीहोर ब्लॉक में 93.3 सेमी दर्ज हुई है। श्यामपुर में 57.5, आष्टा में 56.5, जावर में 46.7, इछावर में 66.8, नसरुल्लागंज में 40.3, बुदनी में 62.9 और रेहटी में 76.4 सेमी बारिश दर्ज हुई है।

इन तीन कारणों के चलते नहीं हो पा रही है तेज बारिश

1 बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम उड़ीसा से हाेते हुए ऊटी से क्रॉस हो रहा था। इससे मालवा और निमाड़ का पूरा जोन तेज बारिश से अछूता रहा।

2 बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम उड़ीसा से होते हुए पूर्वी-पश्चिम मध्यप्रदेश आना चाहिए था, लेकिन ये आंध्रप्रदेश व विदर्भ चले गए। इससे थोड़ी बारिश हुई लेकिन वह प्रर्याप्त नहीं थी।

3 बीत कुछ दिनों अरब सागर से हवा आ रही थी, इसमें आश्चर्य भी था। लेकिन हवा का घुमाव मालवा के जिलों में नहीं होने के कारण तेज बारिश नहीं हो पा रही थी।

फसलों को मिलेगी राहत

मंगलवार को हुई बूंदाबांदी और आने वाले दो दिनों की बारिश फसलों में नई जान फूंक देगी। कई दिनों से बारिश नहीं होने से फसलें सूखने लगी थीं। ऐसे में किसानों को बारिश न होने पर फसल खराब होने की चिंता सताने लगी थी। डॉ. तोमर ने बताया कि जैसे ही खेतों की मिट्टी में दरारें पड़ने लगें तो किसानों को उनकी निंदाई-गुड़ाई करना चाहिए। ताकि खेतों में नमी बनी रहे।

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