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कार्यालय खुले पर खाली पड़ी रहीं कुर्सियां लोग बोले- आंदोलन-हड़ताल ने परेशान कर दिया

3 वर्ष पहले
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शुक्रवार को भी जारी रही लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ की हड़ताल। सूने पड़े रहे कलेक्ट्रेट के सभी विभाग

नहीं मिली डुप्लीकेट अंकसूची
बुदनी निवासी नारायण सिंह ने बताया कि उसके बेटे संतोष की डुप्लीकेट अंकसूची लेने के लिए वह सीहोर डीईओ ऑफिस में आया है। लेकिन यहां बताया कि बाबू छुट्टी पर हैं, अब सोमवार के बाद आना। इतनी दूर से किराया खर्च करके आने के बाद अब वापस जाना पड़ रहा है।

कर्मचारियों की ये हैं प्रमुख मांगें
लिपिक संवर्गों की वेतन विसंगति दूर की जाए।

रमेशचंद्र शर्मा समिति की अनुशंसाओं को लागू किया जाए।

अर्जित अवकाश संग्रहण की सीमा 240 दिवस से बढ़ाकर 300 दिन की जाए।

भृत्य एवं जमादार का पदनाम परिवर्तन किया जाए।

पेंशनरों को सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाए।

पात्रता पर्ची के लिए हो रहे परेशान
हड़ताल के कारण यहां अधिकांश कार्यालयों के कक्ष बंद रहे। हालांकि यहां खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति अधिकारी कार्यालय में जरूर लोग पात्रता पर्ची और गरीबी रेखा का राशनकार्ड बनवाने के लिए भटकते हुए नजर आए। शेखपुरा निवासी दौलतराम पुत्र हरकिशन ने बताया कि उसका नाम गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली सूची में तो जोड़ दिया गया, लेकिन बार-बार चक्कर लगाने के बाद उन्हें पात्रता पर्ची नहीं मिल रही हैं।

सोमवार को खुलेंगे दफ्तार
गुरुवार और शुक्रवार को लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश के कारण दफ्तरों में कामकाज नहीं हो सके। इसके साथ ही अब शनिवार और रविवार को अवकाश है। ऐसे में अब सोमवार को ही दफ्तर खुलेंगे, जिसके बाद काम सुचारू हो सकेंगे।

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