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कुओं में लोग डालते हैं कचरा, अब पानी की हो रही किल्लत, देखरेख होती तो मिलती मदद

3 वर्ष पहले
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नगर में किसी समय दो दर्जन से अधिक कुएं हुआ करते थे लेकिन रख-रखाव के अभाव में यह पूर गए है। जो बच गए उन्हें लोगों ने कचरा घर बना डाला। कुओं के अभाव के कारण पानी का संकट होने लगा है। इनकी देखरेख और रखरखाव किया जाता तो यह भीषण गर्मी में काम आते। अब लोगों को कुएं ही नहीं मिलते हैं। कई लोगों ने तो इन कुओं को बंद करा दिया है।

तीन दशक पहले की बात करें तो उस समय सीहोर नगर में कोई दो दर्जन से अधिक कुएं होते थे। इन सभी में पानी पर्याप्त होता था और गर्मी के मौसम में इन कुओं में से अधिकांश में पानी रहता था। लोग सुबह से लेकर शाम तक इन कुओं पर पहुंचकर अपनी जरूरत का पानी भरकर लाते थे। इसके बाद धीरे-धीरे इन कुओं का रख-रखाव कम होने लगा और यह भी खत्म होने लगे। कई जगह लोगों ने इन कुओं को पूर दिया तो कई जगह कचरा डालते हुए यह पूरी तरह से खत्म हो गए हैं।

लोग डालने लगे कचरा नहीं दिया किसी ने ध्यान

इन कुओं को खत्म होने से बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। लोगों के खेतों से लेकर घरों के आसपास और घरों के अंदर भी कुएं थे। बाद में नलों से जब पानी मिलना शुरु हुआ तो लोग कुओं पर पानी भरने नहीं जाते थे। इस तरह से बाद में ये कुएं अनुपयोगी हो गए तो लोगों ने इनमें कचरा डालना शुरु कर दिया। कई लोगों ने निर्माण कार्य के दौरान जो मिट्टी निकलती है उसे दूर न ले जाते हुए इन कुओं में डाल दिया। इससे ये कुएं पूर गए।

देखरेख की होती तो नहीं होती शहर में पानी की किल्लत

गंज ग्वालटोली निवासी राधेश्याम यादव, मंडी निवासी लीला किशन राठौर सहित अन्य बुजुर्ग बताते हैं कि शहर में पहले पानी के पर्याप्त जल स्त्रोत थे। इससे कभी भी पानी की किल्लत नहीं होती थी। अब हालात बदल गए हैं। नई पीढ़ी ने पानी के महत्व को समझा ही नहीं है। अपनी सुविधा के लिए कुओं को पूरना शुरु कर दिया। इससे शहर में कई कुएं पूर गए हैं।

यदि यह चालू रहते और इनकी देखरेख की जाती तो शहर में कभी भी जल संकट नहीं होता। इस संबंध में नपा सीएमओ सुधीर कुमार सिंह का कहना है कि कई कुएं तो जीवित हैं लेकिन रख रखाव के अभाव में इनसे लोग पानी नहीं भरते हैं। आने वाले समय में इनकी साफ-सफाई के लिए प्लान बनाया जाएगा।

कचरे और मिट्‌टी से पट गए कुएं तो कई जगह लोगों ने अतिक्रमण कर बंद किए

पानी की होती है किल्लत

दो दर्जन में से अब आधा दर्जन कुएं भी नहीं बचे हैं। जो कुएं बच भी गए तो उनसे कोई पानी नहीं भरता था। इस तरह रख रखाव के अभाव में यह कुएं खराब हो गए और अब यहां पर पानी की किल्लत होने लगी। वहीं शहर में नपा तीन दिन छोड़कर पानी सप्लाई कर पा रही है। हालत यह है कि इससे लोगों को इस गर्मी में पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। पहले कुओं से मदद मिल जाया करती थी लेकिन अब लोगों को खरीदकर पानी के टैंकर घरों में डलवाना पड़ते हैं।

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