सीहोर | कृषि उपज मंडी स्थित होटल वृंदावन में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन पंडित शैलेष तिवारी ने भरत चरित्र और भक्त प्रहलाद की कथा सुनाई। उन्होंने ने कहा कि भक्त प्रहलाद सदैव अपने आराध्य को अपने सम्मुख मानते हुए भक्ति में लीन रहते थे। इस कलियुग में सिर्फ भक्ति ही हमें परमात्मा के दर्शन करा सकती है।
सात दिवसीय कथा के तीसरे दिन पंडित श्री तिवारी ने कहा कि प्रहलाद ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना सखा समझकर मित्रता की। जब भक्त प्रहलाद पर विपदा आई तथा हिरण्य कश्यप के अत्याचार बढ़ने लगे। जब भगवान ने नरसिंह अवतार लेकर अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा की। उन्होंने कहा कि भक्त प्रहलाद प्रसंग पर प्रवचन में कहा कि राजा हिरण्य कश्यप खुद को भगवान समझता था। प्रजा को भी वह उसे भगवान मानने के लिए दबाव डालता था। लेकिन हिरण्य कश्यप का पुत्र प्रहलाद विष्णु को ही भगवान मानता था। प्रहलाद के इस भक्ति भाव से हिरण्य कश्यप चिढ़ता था। एक दिन हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद से पूछा कि तुम्हारा भगवान विष्णु कहां रहता है। प्रहलाद ने कहा कि मेरा भगवान हर जगह है। हिरण्य कश्यपु ने एक खंभे की ओर संकेत करके पूछा तो क्या इस खंभे में भी तुम्हारा विष्णु रहता है। प्रहलाद ने जैसे ही हां कहा तो आक्रोश में आकर हिरण्य कश्यप ने उस खंभे को तोड़ने का का प्रयास किया। खंभे के भीतर से ही भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में प्रकट हुए। उन्होंने हिरण्य कश्यप का वध किया।
कथा आयोजन समिति के पदाधिकारी जयंत शाह ने बताया कि रविवार को कथा के चौथे दिवस भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव आस्था और उत्साह से मनाया जाएगा।