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न्यायाधीशों ने कहा- संतोषजनक नहीं है जवाब, डेढ़ माह में दोबारा करें प्रस्तुत
सेंधवा | आपके द्वारा प्रस्तुत जवाब से हम संतुष्ट नहीं है। विस्तृत जवाब 6 सप्ताह के अंदर न्यायालय में प्रस्तुत करें। बाद में प्रकरण में पुनः सुनवाई होगी। सिविल अस्पताल के संबंध में हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ में दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने ये निर्देश राज्य शासन को दिए। सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल में उन्नयन किया है, लेकिन यहां स्वीकृत स्टाफ की पदस्थापना की गई है ना ही सौ बिस्तरीय नया भवन बनाया गया है। मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त नहीं हो रही है। इस विसंगति को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता बीएल जैन ने हाईकोर्ट लगाई गई है। इसकी सुनवाई के बाद जस्टिस पीके जायसवाल एवं जस्टिस एसके अवस्थी ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत जवाब से नाराजगी जाहिर की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने न्यायालय को अवगत कराया कि शहर मुंबई-आगरा राजमार्ग पर बसा हुआ है। जहां आए दिन दुर्घटनाएं होती है पर्याप्त साधनों के अभाव में यहां गंभीर मरीजों को इलाज होता ही नहीं हो पाता। इस कारण कई गंभीर मरीजों की मौत हो जाती है। सोनोग्राफी जांच की सुविधा भी नहीं है। उन्नयन के बाद 114 पद स्वीकृत किए गए थे। शिकायत के बाद न्यायालय ने पद भरने के निर्देश शासन को दिए लेकिन 6 साल बाद भी खाली है। वर्तमान में मात्र 9 डाॅक्टर पदस्थ हैं। नया भवन 54 बिस्तरीय है। शेष भवन पुराना है।