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दिव्यांग ने पंजा कुश्ती में जीते दो सिल्वर; स्वागत

3 वर्ष पहले
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शहर से लगे ग्राम भीलखेड़ा के दिव्यांग युवक ने हौंसले के दम पर पंजा कुश्ती में दो सिल्वर मैडल जीते। छोटे से गांव में रहने वाले मनोज बचपन से पैरों से नि:शक्त है। पिछले दिनों लखनऊ में हुई 42वीं आर्म रेसलिंग चैम्पियनशिप में मनोज ने 2 सिल्वर मैडल जीते हैं। इंडियन आर्म रेसलिंग फेडरेशन के तत्वावधान में रविंद्रालया लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय स्पर्धा में अलग-अलग राज्यों में 25 प्रतियोगियों को पछाड़कर बाएं व दाएं हाथ की स्पर्धा में 2 सिल्वर मैडल हासिल किए हैं।

पहली बार दो सिल्वर मैडल लाने पर गांव के लोगों ने फूलमालाओं से स्वागत किया साथ डीजे साउंड पर गांव में यात्रा निकाली। वर्तमान मे वे कृषि विभाग सेंधवा मे भूमि संरक्षण सर्वे अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया आर्म रेसलिंग मे पंजा कुश्ती की प्रेरणा श्री बजरंग व्यायामशाला के व्यवस्थापक नरेंद्र पारगीर से मिली। यहां वे पहलवानों के सहयोग से पंजा कुश्ती की प्रैक्टिस करते थे। इसके अलावा गांव में लोगों के साथ भी हाथ आजमाया करते थे। यह दूसरी बार उन्होंने मैडल जीता। उन्होंने बताया 40वीं आर्म रेसलिंग चैम्पियनशिप में कांस्य पदक और 41वीं आर्म रेसलिंग चैम्पियनशिप में रजत पदक जीता है। कुश्ती के शौकीन मनोज दिव्यांग होने से अखाड़े में कुश्ती नहीं लड़ने से निराश थे। ऐसे में व्यायामशाला के अध्यक्ष महेश जाधव ने उन्हें आर्म रेसलिंग के बारे में बताया। साथ ही प्रैक्टिस शुरू कराई। उन्होंने बताया व्यायामशाला के अलावा वे गांव में भी लोगों के साथ पंजा लड़ाकर प्रैक्टिस करते थे।

लखनऊ से गृहग्राम भीलखेड़ा लौटने पर ग्रामीणों ने पहनाई फूलमाला, डीजे साउंड पर निकाली यात्रा

परिजन व ग्रामीणों के साथ मैडल दिखाते मनोज पटेल।

दिव्यांग को नहीं मिली कोई सरकारी मदद

राष्ट्रीय स्तर स्पर्धा में जिले व प्रदेश का नाम रोशन करने वाले मनोज को अब तक किसी तरह की योजना का लाभ नहीं मिला है। जबकि शासन द्वारा दिव्यांगों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। उन्होंने बताया अक्टूबर में टर्की में होने वाली 43वीं अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में उनका चयन हुआ है।

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