स्कूल पहुंचने के लिए सड़क नहीं थी। भयावाड़ी से छह किलोमीटर साइकल से स्कूल आया। बारिश में स्कूल आना चुनौती था। स्कूल में अनुशासन के साथ कक्षा न छोड़ने के लिए शिक्षक इतना प्रेरित कर देते थे कि तेज बारिश और कीचड़ भरे रास्ते से भी स्कूल आना जारी रहता था।
शिक्षकों ने हर हाल में अनुशासन में रहने का जो पाठ पढ़ाया उसी से आज अच्छा ओहदा पा सका हूं। यह बात एसडीओ गंगा प्रसाद कुदारे ने अपने स्कूली समय के अनुभव सुनाते हुए कही। कुदारे ताप्ती सर्किल में पदस्थ हैं। भोपाल में पदस्थ टीआई प्रवीण चढोकार ने बताया उन्होंने इसी स्कूल से कक्षा बारहवीं की पढ़ाई की है। अनुशासन उन्होंने यहीं से सीखा है।
दोनो ही अधिकारी पूर्व छात्र सम्मेलन में पूर्व छात्र की तरह शामिल हुए। बालक हायर सेकंडरी स्कूल में 1988 बैच के स्टूडेंट्स ने 30 साल बाद अपने स्कूल से जुड़े संस्मरण दोहराए। स्कूल के इस बैच से निकले स्टूडेंट्स महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में शासकीय अशासकीय सेवाओं में हैं, कुछ व्यापार भी कर रहे हैं। पूर्व छात्रों ने गुरू देवकी नंदन चौधरी का शाल श्रीफल से सम्मान किया।
पुराने साथी मिले तो ताजा हुईं यादें
कार्यक्रम में मुंबई से संजय अग्रवाल, राजनांदगाव से अमिताभ पाल, जबलपुर से र|ा स्वामी, भोपाल से मीना मंडल और अनेकों पूर्व छात्र शामिल हुए। स्कूल के 1976-77 बेच के छात्र पवन सिंह ठाकुर और 1978 बेच के मनोज शुक्ल भी शामिल हुए। उन्होंने बताया उस समय स्कूल निजी शिक्षण संस्था थी।
सुनाए गीत और कविताएं : देर रात तक चले कार्यक्रम में कवि मनोज हिंदुस्तानी, मोहन शर्मा ने कविताएं भी सुनाईं। बैतूल से आए डैनी, प्रिंस ने गीतों की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर मोहन शर्मा, अजय जगताप, सुनील सिरोरिया, गिरीश सोलंकी, संजीव गुप्ता, राजकुमार अवस्थी स्कूल के शिक्षक उपस्थित थे।