भयावाड़ी में चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को भगवान कृष्ण के जन्म की कथा में श्रोता भावविभोर होकर झूमे। कथा में पं. भूपेंद्र शास्त्री ने कहा भगवान सहज दया के धाम हैं और इस कलियुग में उनके नाम स्मरण से मनुष्य भव सागर के पार हो जाता है, लेकिन शर्त यह है कि हमारा परमात्मा के प्रति समर्पण भाव हो।
वर्तमान में जीव माया मोह के बंधन में बंधा है। सत्य जानते हुए भी उसे सदैव झुठलाने का प्रयास करता है। माया के मोह पाश में बंधा जीव अनेक बाधाओं का सामना कर दुख पाता है, लेकिन वही जीव जब सत्संग करता है तो और नारद जैसा गुरु उसे मिल जाता है। पं. शास्त्री ने आगे कहा मनुष्य को सदगुरु का सानिध्य ही भवसागर से पार करा सकता है और दुखों से मुक्ति दिला सकता है। जैसे-जैसे जीव के मन में करुणा, प्रेम अनुशासन, सत्य और सरलता आती है। वैसे ही परमात्मा की कृपा का अधिकारी बनने लगता है।
परमात्मा की शरण गए जीव से माया का प्रभाव हट जाता है और उसकी विपत्तियों का शमन होने लगता है। उन्होंने आगे बताया भगवान के आगमन से सारे बंधन हट जाते है और जीवन के अंधकार दूर हो जाते हैं। इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का भी बखान किया।