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अब लोग दीपावली तो मनाते हैं लेकिन श्रीराम के आदर्श भूल गए : रामायणी

3 वर्ष पहले
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श्री सुंदर कांड महिला संकीर्तन मंडल द्वारा हुडा पार्क में आयोजित संगीतमयी श्री रामकथा में प्रह्लाद मिश्र रामायणी ने कहा कि श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में हर साल दीवाली तो मनाई जाती है लेकिन श्री राम के आदर्शों को भुला चुके हैं।

रामायण वाल्मीकि ने लिखी है और उसके बाद गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीरामचरितमानस की रचना की। इनमें भगवान श्री राम के जन्म से लेकर राम-विवाह तक के बहुत से घटनाक्रम आते हैं। सुनने में यह जितने मर्मस्पर्शी और मनोहर लगते हैं यह उससे भी ज्यादा प्रभावी इन कथाओं से मिलने वाली प्रेरणा होती है। आज हम किसी दुखी व्यक्ति के दुख को कम करने के बजाए सोचते हैं कि इसे कैसे और परेशान किया जाएं। मौके पर संकीर्तन मंडल की प्रधान कमल ढींगरा, वीना सचदेवा, वीनू शर्मा, ज्योति सचदेवा, सुनीता, प्रकाश कौर, नीलम, संतोष, शशी, निशा, संगीता, मीनाक्षी, सुदेश, मेवारानी, मंजू, ईशा सचदेवा, बबिता उपस्थित रहीं।

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