अन्तरष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के संत रामशरण (जोधपुर) ने कहा कि वाल्मीकि रामायण इस सृष्टि का प्रथम महाकाव्य है। इसके रचयिता महर्षि वाल्मीकि आदि कवि थे।
इस ग्रंथ को वेदावतार माना जाता है। चारों वेद का महात्म्य रामायण में रामकथा के रूप में वर्णित है। सुदर्शन स्टेडियम में रामचरित मानस मंडल शाहपुरा की ओर से नौ दिवसीय राम कथा के पहले दिन उन्होंने राम कथा का महत्व बताया। शुभारंभ शिव-पार्वती के संवाद से शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि एक परात्पर ब्रह राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न के रूप में चार रूपों में अवतरित हुए हैं और चार वेद रामायण में एकीकृत होकर उस एक का गुणानुवाद कर रहे हैं।
इस मौके पर चितौड गढ़ ऱामद्वारा के महंत रमताराम, संत दिग्विजय राम, मानस मंडल के शंकरलाल तोषनीवाल, कैलाश राजगुरु, रघुनाथ वैष्णव, गोपाल राजगुरु सहित कई सदस्य व संतों ने कथा श्रवण की।
शाहपुरा के सुदर्शन स्टेडियम में शुरू हुआ आयोजन, पहले दिन रामकथा का महत्व बताया