शाहपुरा | सगतपुरिया स्थित बैकुंठधाम जुझार धणी में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथा की शुरुआत मंगलाचरण आरती से किया गया।
पंडित भगवती कृष्ण महाराज ने कहा कि भागवत अलौकिक शास्त्र है। जिसका शुकदेव मुनि से पूर्व किसी को ज्ञान नहीं हुआ। प्रभु भक्ति की महिमा निराली है। वे प्रत्येक प्राणी की रक्षा करते हैं। सती प्रसंग और ध्रुव चरित्र पर चर्चा की। वेद व्यास द्वारा भागवत महापुराण की रचना के बाद शुक देव मुनि ने राजा परीक्षित को इसका श्रवण कराकर 7 दिन में उनका उद्धार कर इस नाम ग्रंथ की महिमा से जगत को अवगत कराया। जीवन मुश्किल से मिलता है, इसलिए जीवन को सत्कर्म में लगाएं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को ईश्वर और मौत को हमेशा याद रखना चाहिए। उपकार को हमेशा भूल जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भागवत से मुक्ति का मार्ग मिलता है। कथा में शुकदेव के जन्म प्राकट्य का वर्णन किया गया। बैकुंठधाम जुझार धणी परिसर में कथा श्रवण करने पहुंचे भक्तों का उपासक महेंद्र पारीक ने स्वागत किया। आयोजन समिति के महेंद्र जोशी, ओमप्रकाश जोशी, दुर्गाशंकर जोशी, श्याम जोशी, भैरूलाल प्रजापत, लोकेश, पवन जोशी, भैरूलाल, नरेश पाठक, रघुवीर पारीक की अगुवाई में कार्यकर्ता व्यवस्था में जुटे हैं। कथा प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक हो रही है। कथा के दौरान यज्ञाचार्य पंडित कल्याण मल शर्मा की अगुआई में एक कुंडीय यज्ञ का आयोजन कर आहुतियां दी गई।