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यज्ञ में यजमानों ने जन कल्याण के लिए दी आहुतियां

3 वर्ष पहले
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सगतपुरिया गांव के बैकुंठधाम जूझार धणी में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को कथा वाचक भगवती कृष्ण महाराज ने कहा कि भागवत कथा मानव को मृत्यु के भय से मुक्त कर देती है। जिन पर परमात्मा की कृपा हुई है, वही इस कथा मंडप में पहुंचे हैं। इससे पहले यज्ञाचार्य पंडित कल्याणमल शर्मा की अगुवाई में एक कुंडीय यज्ञ में यजमानों ने जन कल्याण के लिए आहुतियां दी। भगवती कृष्ण महाराज ने कहा कि बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे हैं वहां आपका, अपने इष्ट या गुरु का अपमान न हो। यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर नहीं जाना चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों न हो। कथा के दौरान सती चरित्र प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव की बात नहीं मानने पर सती के पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाह होना पड़ा। ध्रुव चरित्र कथा सुनाते हुए कहा कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि द्वारा अपमानित होने पर भी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया।

सगतपुरिया बैंकुठ धाम में भागवत कथा का आयोजन

कृष्ण ने भीष्म पितामह से कहा-पिछले जन्म में नाग को कांटों में फेंकने से आपको बाणों की शैय्या पर लेटना पड़ा ... भगवती कृष्ण ने कहा कि भीष्म पितामह 6 महीने तक बाणों की शैय्या पर लेटे थे। तब वे सोच रहे थे कि मैंने कौन सा पाप किया है जो मुझे इतने कष्ट सहन करना पड़ रहे हैं। उसी वक्त भगवान कृष्ण भीष्म पितामह के पास आते हैं। तब भीष्म पितामह कृष्ण से पूछते हैं कि मैंने ऐसे कौन से पाप किए हैं कि बाणों की शैय्या पर लेटा हूं पर प्राण नहीं निकल रहे हैं। कृष्ण ने भीष्म से कहा कि आप अपने पुराने जन्मों को याद करो और सोचो कि आपने कौन सा पाप किया है। भीष्म ज्ञानी थे। उन्होंने कृष्ण से कहा कि मैंने पिछले जन्म में कोई पाप नहीं किया है। इस पर कृष्ण ने उन्हें बताया कि पिछले जन्म में जब आप राजकुमार थे और घोड़े पर सवार होकर जा रहे थे। आपने एक नाग को जमीन से उठाकर फेंक दिया, जो कांटों पर लेट गया था पर 6 माह तक उसके प्राण नहीं निकले थे। उसी कर्म का फल है कि आप 6 महीने तक बाणों की शैय्या पर लेटे हैं।

भागवत की भक्ति का आदर्श हैं कृष्ण की गोपियां ... भगवती कृष्ण ने कहा कि भागवत जीवन दर्शन का ग्रंथ है। यह जीवन जीने की कला का मार्गदर्शन करता है। भागवत की भक्ति का आदर्श कृष्ण की गोपियां हैं। गोपियों ने घर नहीं छोड़ा। उन्होंने स्वधर्म त्याग नहीं किया वे वन में नहीं गई फिर भी वह भगवान को प्राप्त कर सकीं। भागवत ज्ञान, वैराग्य को जागृत करने की कथा है। ज्ञान और वैराग्य मनुष्य के अंदर हैं, पर वह सोए हुए हैं। भागवत के अलावा अन्य कोई ग्रंथ नहीं जो मनुष्य मात्र को सात दिन में मुक्ति का मार्ग दिखा दे।

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