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सुबह जल्दी पहुंचाया कैश... 2 घंटे में खाली, फिर डाला वो भी खत्म, दुकानदारों ने निकाली पुरानी स्वैप मशीनें
कैश की किल्लत से लोगों को दूसरे दिन भी राहत नहीं मिली। दिनभर एटीएम पर भीड़ लगी रही। हालांकि बैंकों ने समय से पहले मशीनों में राशि डाल दी। दो बार कैश पहुंचाया, लेकिन इतना ज्यादा कैश निकाला गया कि कुछ घंटों में ही आधे से ज्यादा एटीएम खाली हो गए। हालांकि कई लोगों ने कैश किल्लत से बचने के लिए कैशलेस ट्रांजेक्शन शुरू कर दिया है। खासकर पेट्रोल पंप, कपड़ा दुकानों और ज्वेलर्स के यहां मशीनों में कार्ड स्वैप कर लोगों ने पैमेंट दिया।
नोटबंदी के बाद अब फिर व्यापारियों ने अपनी स्वैप मशीनों की धूल साफ कर काउंटर पर रख दी हैं। खरीदी करने वाले भी एटीएम मशीनों से नोट निकालने के बजाय सीधे कार्ड स्वैप कर भुगतान करने लगे हैं। व्यापारियों व ग्राहकों से बातचीत में यह बात सामने आई है कि कैश की कमी होने के बाद बुधवार को अचानक स्वैप मशीन से भुगतान करने वाले लोगों की संख्या 30 से 40 फीसदी तक पहुंच गई है। इससे कुछ राहत यह मिली कि मंगलवार को अचानक बैंक में बढ़े लोड के मुताबिक बुधवार को बैंक में लोगों की भीड़ कुछ कम हुई। भारतीय स्टेट बैंक मगरिया शाखा के वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप तिवारी ने बताया फिलहाल स्थिति सामान्य है। एसबीआई के सभी एटीएम में डिमांड के मुताबिक कैश डाला गया है।
शहर के एटीएम सेंटरों पर पूरे दिन उपभोक्ताओं की भीड़ लगी रही।
वक्त से पहले पहुंचाया कैश, फिर भी रहे ऐसे हालात
एटीएम में कैश डालने का काम वैसे तो 11 बजे बाद शुरू होता है, लेकिन किल्लत को ध्यान में रखते हुए मंगलवार सुबह 10 बजे और बुधवार को 9.30 बजे से ही बैंक अधिकारियों ने एटीएम में नोट डालने के निर्देश दे दिए थे।
शहर में 100 से ज्यादा मशीनें
शहर में 100 से ज्यादा छोटे-बड़े व्यापारियों ने स्वैप मशीन ले रखी है। ये व्यापारी भी अब ग्राहकों को कार्ड स्वैप कर भुगतान करने की सलाह देने लगे हैं। इसका असर भी हुआ और बड़ी संख्या में लोगों ने इसका उपयोग किया।
मशीन से ही कैश ट्रांसफर भी कर रहे लोग
विशाल शर्मा ने बताया वे निजी कंपनी में कैशियर हैं। इस कारण हर दिन ट्रांजेक्शन के लिए बैंक जाना पड़ता है। अकसर भीड़ रहती है। इस कारण मैं कैश डिपॉजिट मशीन से ही दूसरे शहर में कंपनी के अकाउंट में राशि जमा कर रहा हूं। इससे समय की भी बचत होती है।
ऐसे मिली किल्लत से कुछ राहत
ज्यादातर लोग कार्ड से ही कर रहे भुगतान
सोमवारिया बाजार में कपड़ा शोरूम संचालक गोविंद रामचंदानी ने बताया यहां आने वाले करीब 50 प्रतिशत ग्राहक कार्ड के जरिये भुगतान करने लगे हैं। बुधवार को विजय नगर निवासी योगेश मालवीय ने कपड़े खरीदी का भुगतान स्वैप मशीन के जरिये ही किया। करीब आधे घंटे में 8-10 ग्राहकों ने ऐसे ही लेन-देन किया।
सराफा में शहरी लोग करने लगे इस्तेमाल
सराफा दुकान पर परिजन के साथ खरीदी करने पहुंचे निजी कंपनी में अधिकारी अजय मिश्रा ने भी स्वैप कार्ड से भुगतान किया। सराफा व्यापारी विपिन नवाब की मानें तो शहरी ग्राहकों में से आधे ने स्वाइन मशीन से ही भुगतान किया। ग्रामीण ग्राहक फिलहाल इतना अपडेट नहीं हो सके हैं।
पंपों पर भी ज्यादातर भुगतान मशीन से ही
पेट्रोल पंप संचालकों ने भी अब स्वैप मशीन निकाल ली है। नगद राशि लेकर बाद में खुुल्ले पैसे के झंझट से बचने के लिए भी स्वैप मशीन आसान तरीका है। पंप संचालक अजीज भाई ने बताया शहरी युवा, बैंक कर्मी, बाहर से यहां आकर नौकरी करने वाले ग्राहकों सहित यहां के व्यापारी भुगतान स्वैप कार्ड से कर रहे हैं। बुधवार को कालीसिंध से आए शिवपालसिंह ने भी कार्ड से भुगतान किया।