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11 दिन बाद जिस घर से बेटी की डोली उठना थी, वहां पिता का शव पहुंचते ही पसरा मातम

3 वर्ष पहले
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अपनी बेटी रचना की शादी के लिए पिछले दो माह से तैयारियां कर रहे चक्रधर परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटी की डोली उठने में सिर्फ 11 दिन बचे थे, लेकिन किसी सदस्य को नहीं पता था कि घर के दरवाजे तक आई खुशियां रूठ जाएगी। ऐसे ही गमगीन माहौल में होमगार्ड सैनिक रामचंद्र चक्रधर का अंतिम संस्कार किया गया। ज्ञात रहे रविवार देर रात मोहन बड़ोदिया में वाहन अधिग्रहण पाइंट पर कार ने दल को रौंद दिया था। इसमें रामचंद्र की शाजापुर अस्पताल में लाने के पहले ही मौत हो गई थी।

परिजन के मुताबिक रामचंद्र की बेटी रचना की गत माह ही देवास में सगाई तय हुई थी। शादी 27 अप्रैल को होना थी। पिता रामचंद्र भी ड्यूटी पर जाने के पहले घर में तैयारियों के संबंध में चर्चा कर रूपरेखा बनाने बेटे रोहित को जिम्मेदारी भी सौंपी, लेकिन उनके स्थान पर उनका शव ही शाजापुर आया। सोमवार को शाजापुर में अंतिम संस्कार किया गया। वहीं होमगार्ड के अन्य जवानों ने मोहन बड़ोदिया अस्पताल पर लापरवाही के आरोप भी लगाए। साथी कर्मचारी बीएस नाथ तो हादसे के बाद बदहवास हो गए। जिला अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने डिस्ट्रिक्ट होमगार्ड कमांडेंट विक्रम मालवीय को बताया कि डाॅक्टर समय रहते इलाज शुरू कर देते तो उसकी जान बच जाती।

कार शाजापुर पासिंग, दूल्हा-दुल्हन बैठे थे

जिस कार ने दल को रौंदा था, उसका पता आरटीओ कर्मचारियों ने निकाल लिया है। बताया जा रहा है कि कार शाजापुर पासिंग थी। हादसे के समय कार में दूल्हा-दुल्हन भी बैठे थे। लेकिन सोमवार को भी कार जब्त नहीं हो पाई। वहीं आरटीओ में पदस्थ दिलीप राठौर के पैरों की गंभीर चोट में सुधार बताया जा रहा है।

रामचंद्र

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