गाइड लाइन के नाम पर अफसरों ने इस बार ऐसा छलावा किया कि शहर की अाधी से ज्यादा कॉलोनियों की पहचान ही खत्म हो जाएगी। कॉलोनियों के बजाए क्षेत्रों की पहचान मुख्य मार्ग पर और मुख्य मार्ग से अंदर के नाम में ही पंजीयक विभाग में क्षेत्रों की पहचान होगी। इससे कई कॉलोनियों की गाइड लाइन स्वत: ही बढ़ जाएगी। जिन कॉलोनियों में जमीनों के दाम 300 से 400 रुपए स्क्वेयर फीट है, उनके रेट भी मुख्य मार्ग और मुख्य मार्ग के अंदर वाले दो स्लैब के कारण 800 से 900 रुपए स्क्वेयर फीट हो जाएगा। जबकि बैठक में तय किया गया था कि इस बार कीमतें नहीं बढ़ाई जाएंगी।
उप पंजीयक संतोष केवट ने बताया अव्यवस्थित रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के लिए ऐसा किया है। इससे कुछ क्षेत्रों की गाइड लाइन बढ़ने की बात भी स्वीकारते हुए उन्होंंने कहा व्यवस्थित करने में कुछ क्षेत्रों पर तो प्रभाव पड़ेगा। नगर पालिका की सहमति के बगैर कॉलोनियों या क्षेत्रों को विलोपित नहीं करने संबंधी नियम की बात कहने पर कहा कि नपा के पास रिकॉर्ड है ही कहां। कई बार नपा से रिकॉर्ड मांगा गया, लेकिन उपलब्ध नहीं कराया। ऐसे में हमें तो हमारा रिकॉर्ड व्यवस्थित करना था सो कर दिया। रही बात नामांतरण आदि की तो वहां भी नपा नए सिरे क्षेत्रों को अंकित कर नामांतरण आदि करना शुरू कर देगी।
गाइड लाइन के नाम पर छलावा क्यों
पहले कहा- इस बार गाइड लाइन में जमीनों की कीमतें नहीं बढ़ाई जाएंगी
उप पंजीयक बोले- कीमत-क्षेत्र व्यवस्थित करना है, इससे कीमतों पर असर तो आएगा, नपा के पास तो रिकॉर्ड ही नहीं है
वार्ड 28 का यह इलाका जिसके 41 अलग क्षेत्रों को गाइड लाइन में विलोपित कर दिया गया है
सुबह से शाम 5 बजे तक कलेक्टर का इंतजार
कुछ भू-स्वामी और सस्ते में प्लॉट खरीदने वाले सोमवार को आपत्ति दर्ज कराने कलेक्टोरेट पहुंचे। सुबह टीएल के कारण दोपहर 1 बजे तक कलेक्टर श्रीकांत बनोठ से मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद कलेक्टर किसी काम से चले गए। शाम 5 बजे तक इंतजार करने के बाद भी उनसे मुलाकात नहीं हो पाई।
5-6 लोगों ने दर्ज कराई आपत्ति- गाइड लाइन पर आपत्ति दर्ज कराने के अंतिम दिन 5-6 लोगों ने लिखित रूप से गाइड लाइन को गलत ठहराते हुए सुधार की मांग की है। हालांकि अफसरों के इस रवैये को देखते हुए इन आपत्तियों की सही तरीके से सुनवाई होने पर भी प्रश्न चिह्न लग गया है।
फिर पहल की - कई क्षेत्रों में गाइड लाइन और वास्तविक कीमत में काफी अंतर है, इसे खत्म करने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे
कीमत भले ही बढ़े, एक जैसे भाव हों
कई क्षेत्रों को विलोपित करने के पीछे अफसरों के अजीब तर्क है। जिम्मेदारों की मानें तो गाइड लाइन में एकरूपता लाने के लिए ऐसा किया है। यानी जमीन के रेट भले ही कम या ज्यादा हों, उससे उन्हें कोई मतलब नहीं। उन्हें तो गाइड लाइन में एकरूपता लाना है। कलेक्टर श्रीकांत बनोठ का कहना है एकरूपता लाने के लिए एक ही क्षेत्र के अलग-अलग रेट वाले क्षेत्रों को जोड़ा गया है। इससे अब तक अा रही असमानता कम होगी। यदि इसमें कोई दिक्कत है और लोगों ने आपत्तियां ली है तो एक बार और दिखवा लिया जाएगा।
दो उदाहरण... ऐसे समझें गाइड लाइन के बदलाव से क्या असर होगा
24 क्षेत्रों को घटाकर 4 में बदल दिया
2 पैमाने- मुख्य मार्ग से अंदर
और बाहर
वार्ड 26 शहर का सबसे बड़ा वार्ड है। करीब 8-10 हजार वोटर वाला यह क्षेत्र काफी दूर तक फैला है। पिछली गाइड लाइन में ही इस क्षेत्र को क्रमांक 901 से 925 यानी 24 अगल-अलग क्षेत्रों में बांटकर क्षेत्रों के मान से अलग-अलग गाइड लाइन तय की थी। लेकिन अब इस पूरे वार्ड को सिर्फ 4 क्षेत्रों में बांट दिया है। इसमें एक आदित्य नगर के मुख्य मार्ग पर और दूसरा मार्ग के अंदर। इसी प्रकार आईटीआई के पास से निकले मुख्य मार्ग पर और मार्ग के अंदर नाम से ही बांटा गया है। इस मान से ज्योति नगर, अहमद नगर, पॉलीटेक्निक कॉलेज के पीछे सहित कई क्षेत्र जिनकी गाइड लाइन कम थी, उनके रेट ज्यादा हो जाएंगे।
वार्ड 28 के 41 क्षेत्रों को हटा दिया, पहले 71 क्षेत्र थे, जो 30 हुए, पहचान भी गायब
डाइट भवन से लेकर सरस्वती शिशु मंदिर, दुपाड़ा रोड से नई सड़क तक पूरे वार्ड में अब तक 71 अलग-अलग क्षेत्रों को अलग-अलग नाम से पहचान बताते हुए गाइड लाइन तय थी। अब नई गाइड लाइन में इसमें से 41 क्षेत्रों को हटा दिया गया। अब सिर्फ 30 क्षेत्र ही शामिल है। डाइट भवन से लेकर सरस्वती शिशु मंदिर तक कई जगह गाइड लाइन 200 रुपए स्क्वेयर फीट है। वहीं कुछ डेवलप कॉलोनियों में 450 रुपए तक रेट हैं। नई सड़क वाले हिस्से में 600 रुपए के भाव हैं। बदलाव से 450 रुपए के भाव बढ़कर 550 तक हो जाएंगे।
...और आखिर में किया क्या- क्षेत्रों को बदलकर सस्ते को भी महंगा कर दिया
नफा-नुकसान... घर खरीदना और महंगा, रेवेन्यू में होगी बढ़ोतरी
नफा... गाइड लाइन के लिए हुई बैठक में बढ़ोतरी नहीं करने का निर्णय लिया गया, लेकिन बदलाव करने से कई क्षेत्रों में घर या प्लॉट खरीदना दोगुना तक महंगा हो जाएगा। इससे फायदा सिर्फ राजस्व का होगा। इसमें काफी बढ़ोतरी हो जाएगी।
नुकसान... गाइडलाइन ज्यादा होने के कारण शहर व शहर से जुड़े क्षेत्रों की कई कॉलोनियों में पिछले एक-डेढ़ साल से रजिस्ट्रियां होना ही बंद हो गई हैं। लोग इन क्षेत्रों में अब स्टाम्प पेपर पर ही सौदेबाजी करने लगे हैं। इन क्षेत्रों में बिल्लौद रोड स्थित राधा स्वामी सत्संग आश्रम के समीप से लेकर लालघाटी से लगे मंगल सिटी कॉलोनी और दिल्लौद रोड बयड़ा, मूलीखेड़ा आदि कई क्षेत्र शामिल हैं। इससे राजस्व का नुकसान हो रहा है।