शहरी हाईवे के 5 किम

3 वर्ष पहले
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5 किमी का हाईवे : 8 साल में 9 करोड़ खर्च, ड्रेनेज सिस्टम फेल, नाली सड़क से 1 फीट ऊंची, पानी जाएगा कैसे, फिर 50 लाख खर्च की तैयारी

शहरी हाईवे के 5 किमी रास्ते को सुधारने के नाम पर 8 साल में अफसरों ने 9 कराेड़ रुपए बर्बाद कर दिए। पहले डिवाइडर और चौड़ीकरण के नाम पर 5 कराेड़ रुपए खर्च किए गए। फिर शहर डेढ़ किमी में नाली निर्माण सहित डामरीकरण के नाम पर 4 करोड़ रुपए बर्बाद हुए। इस निर्माण में लोगों की समस्या कम करने के बजाए और बढ़ा दी। बारिश के पानी की निकासी होने के बजाए नाली की हाइट सड़क से ऊपर होने के कारण यहां जमा होना शुरू हो गया। करोड़ाें रुपए बर्बाद होने के बाद शहरी हाईवे का सौंदर्यीकरण करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर नए सिरे से प्लान तैयार हुआ। लेकिन 50 लाख रुपए के इस प्लान पर काम शुरू करते ही अड़चनें पैदा हो गई और मामला अधर में ही लटक गया।

यह परेशानी
बगैर मापदंडों के डिवाइडर के नाम पर बनी दीवारों से दुर्घटना का खतरा। टंकी चौराहे से वाटर वर्क्स तक बारिश के समय भरा रहेगा पानी। पानी निकासी नहीं होने से डामर सड़क को उखड़ेगा और गड्ढे बनेंगे।

2010 में
डिवाइडर और चौड़ीकरण के नाम पर 5 करोड़ खर्च

गड़बड़ी... ठेकेदार ने सड़क की हाइट से नाली कहीं आधा तो कहीं एक फीट ऊंची बनाई। हाइट ज्यादा होने से बारिश का जो पानी पहले बह जाता था अब वह भी जमा हो जाता है।

2015 में
तर्क... नाली निर्माण ऐसा ही होता है। पानी निकासी के लिए कुछ स्थान बनाए जाते हैं, जाे बनाए हैं। वैसे रोड चौड़ीकरण कराकर नालियों तक पक्का निर्माण कराने का प्लान तैयार था। ऐसा करने के बाद पानी निकलेगा।

4 करोड़ रुपए से डामरीकरण और नाली का निर्माण किया

...और 2018 में
इतने खर्च के बाद भी...हादसे का डर, बारिश में होता है जलजमाव

2010 : डिवाइडर बनाने पर 5 करोड़ रुपए खर्च

2010 में सांसद सज्जनसिंह वर्मा ने केंद्रीय मंत्री कमलनाथ से शाजापुर शहरी हाईवे के लिए 5 करोड़ रुपए का स्पेशल पैकेज स्वीकृत कराया। एनएचएआई के अफसरों ने ड्राइंग डिजाइन तैयार कर काम शुरू कराया। अतिक्रमण नहीं हटने से चौड़ीकरण नहीं हुआ। संकरे हाईवे पर ही डिवाइडर के नाम पर आड़ी-तिरछी एक फीट चौड़ी दीवार खड़ी करा दी। करीब दो-तीन साल काम चला और अफसरों से मिलकर ठेकेदार ने अपना भुगतान लेकर काम समाप्त करा दिया।

जितना काम, उतना ही भुगतान कर दिया
निर्माण एजेंसी काम कर रही थी। लेकिन वहां के रहवासियों ने अतिक्रमण नहीं हटाया। इससे काफी काम प्रभावित हुआ। रही बात ठेकेदार को भुगतान करने की तो जितना उसने काम किया था। उतना भुगतान कर दिया गया है। - रवींद्र गुप्ता, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई

सौंदर्यीकरण के लिए लाखों का बजट खर्च करने की तैयारी

2015 : स्पेशल पैकेज भी लाए, 4 करोड़ खर्च किए...सुधरा कुछ नहीं

2015 में शाजापुर विधायक अरुण भीमावद शहरी हाईवे को सुधारने की मंशा लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिले। हाईवे फोरलेन का निर्माण का टेंडर हो जाने से राशि मंजूरी में अड़चनें आईं। बावजूद केंद्रीय मंत्री ने टंकी चौराहे से दुपाड़ा रोड वाले करीब 3 किमी हिस्से के लिए 4 करोड़ रुपए मंजूर किए। इस राशि से उक्त क्षेत्र में डामरीकरण किया जाना था। 2.50 करोड़ रुपए से बीच के टंकी चौराहे से वाटर वर्क्स तक के हिस्से में नाली निर्माण होना था। ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण फेल हो गया। ठेकेदार ने सड़क की हाइट से कहीं आधा तो कहीं एक फीट ऊंची नाली बना दी। पूरी नाली कचरे और मिट्टी से पैक हो गई। हाइट ज्यादा होने से बारिश का जो पानी वहीं जमा हो जाता है। इससे सड़क भी बारिश होते ही उखड़ जाती है।

...लेकिन मुसीबत अब भी वहीं
एनएच अफसरों की शिकायत करेंगे
बड़ी मुश्किल से केंद्रीय मंत्री से राशि मंजूर कराई थी। एनएचएआई के अफसरों की उदासीनता के कारण उसका लाभ नहीं मिल सका। इनकी शिकायत करूंगा। - अरुण भीमावद, विधायक शाजापुर

2018 : 50 लाख में से आधी राशि पहुंची

प्रशासन ने शहरी हाईवे सौंदर्यीकरण के लिए प्लान तैयार कराया। बीच में 8 स्थानों पर साइट में गार्डनिंग, सर्विस रोड के लिए स्थान भी चिह्नित हो गए। 50 लाख के इस प्लान के लिए 25 लाख रुपए प्रशासन ने नपा को भी दे दिए। नपा ने जैसे ही सर्विस रोड का काम शुरू करने के लिए चूने की लाइनें डाली, बवाल मच गया। सर्विस रोड के लिए चयनित स्थान पर कई लोगों ने अपने प्लॉट होने का दावा किया। मामला कोर्ट में लगा दिया। इससे निर्माण अटक गया।

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