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दर नहीं बढ़ाई... पर कम कीमत वाले कई क्षेत्रों को महंगे में जोड़ा

3 वर्ष पहले
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नई गाइड लाइन बनाने की आड़ में शहर के लोगों के साथ बड़ा छलावा किया जा रहा है। नियमानुसार क्षेत्रों का विस्तार किया जाना चाहिए, लेकिन इसके बजाय कम कीमत वाले कई क्षेत्रों को मूल गाइड लाइन से ही विलोपित कर दिया और महंगे क्षेत्र में जोड़ दिया। नतीजा- कम कीमत वाले कई क्षेत्रों के रेट गाइड लाइन में 100 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ जाएंगे। स्टाम्प शुल्क कई गुना ज्यादा चुकाने के बाद नगर पालिका में नामांतरण कराने से लेकर संपत्ति लोन लेने में भी परेशानी आएगी। वे अपने प्लॉट या मकान की सही तरीके से पहचान ही नहीं बता सकेंगे।

इस बार गाइड लाइन में जमीन की कीमतें न बढ़ाने की बात कही जा रही है। इस राहत के बहाने एक बड़ा छलावा हो गया। इतना ही नहीं, भू-स्वामी और कॉलोनाइजरों को आपत्ति लेने का मौका भी नहीं दिया गया। ब्लॉक स्तरीय मूल्यांंकन समिति की बैठक में गाइड लाइन तैयार कर ली। 17 मई (गुरुवार) को दोपहर बाद तक जिला मूल्यांकन समिति की बैठक चली। इसकी आपत्ति लेने के लिए शाम को सूचना प्रकाशित की गई। मौका दिया 21 मई तक का। इसमें 19 व 20 मई को अवकाश रहा। यानी सिर्फ 18 और 21 मई का दिन ही मिलेगा।

ऐसे समझें- खरीदना महंगा, पहचान बताना भी मुश्किल

शहर के वार्ड 28 में पुरानी गाइड लाइन के मान से 71 से भी ज्यादा अलग-अलग क्षेत्र और अलग-अलग रेट तय किए गए थे। इस बार अफसरों ने क्षेत्रों को बढ़ाने के बजाय कम कर दिया। 71 क्षेत्रों को घटाकर लगभग 50 महंगे क्षेत्रों को ही शामिल किया है। इसमें पहले कुछ जो क्षेत्र सस्ते थे, उन्हें विलोपित कर महंगे क्षेत्रों में जोड़ दिया गया। इसके कारण इन सस्ते क्षेत्रों के रेट स्वत: ही कई गुना ज्यादा बढ़ जाएंगे। साथ ही प्लॉट या मकान किस क्षेत्र में हैं, उसकी वर्तमान पहचान ही समाप्त हो जाएगी।

ऐसे पता करें- कॉलोनी का नाम पहले था, अब नहीं...तो बढ़ रहे हैं रेट, तत्काल आपत्ति दर्ज कराना होगी

जिला रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचकर कॉलोनाइजर यह देखें कि गाइड लाइन में उनकी कॉलोनी या क्षेत्र का नाम है या नहीं। यदि पिछली बार नाम था और इस बार नहीं है, तो समझ लीजिए आपकी कॉलोनी या क्षेत्र को विलोपित कर दिया गया है। उसे महंगे क्षेत्र में शामिल कर लिया गया है। इससे स्वत: ही वहां के रेट महंगे (मुख्य मार्ग क्षेत्र) में शामिल हो जाएगा। यदि ऐसा है तो तत्काल आपत्ति दर्ज कराएं।

कलेक्टर-विधायक को किया गुमराह

उप पंजीयक से लेकर जिला पंजीयक तक के अफसरों ने गाइड लाइन नहीं बढ़ाने की बात कहते हुए कलेक्टर श्रीकांत बनोठ व विधायक अरुण भीमावद को भी गुमराह करने का काम किया। समिति की बैठक में अफसर भी इस बात को नहीं समझ सके। क्षेत्र विस्तार करने के बजाय विलोपित करने जैसे गंभीर मुद्दों को अफसर और जनप्रतिनिधि भी नहीं समझ सके। नियमानुसार उप पंजीयक और जिला पंजीयक को बढ़ते हुए क्षेत्रों को विलोपित करने का अधिकार ही नहीं है। नियमानुसार स्थानीय निकाय से संपर्क कर वहां के रिकॉर्ड के अनुसार ही क्षेत्रों को बढ़ाया या घटाया जा सकता है।

जानकारी लूंगा

यदि सस्ते क्षेत्रों को विलोपित कर महंगे में शामिल किया है, तो गंभीर बात है। ऐसा है तो इसकी जानकारी लूंगा। आज ही इस मामले को दिखवाऊंगा। अरुण भीमावद, विधायक व सदस्य जिला मूल्यांकन समिति शाजापुर

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