हम इस समय शहर से 14 किमी दूर ग्राम चौंसला कुल्मी के एक घर में हैं। यह घर उसी दिव्यांग छात्र प्रवीण पिता हरिनारायण पाटीदार (20) का है, जिसे बीते शुक्रवार को हिरपुरटेका के एक कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री दीपक जोशी ने लेपटॉप देकर सम्मानित किया था। मध्यमवर्गीय परिवार से होकर भी जन्म से दृष्टि बाधित प्रवीण शिक्षा और स्वावलंबन के क्षेत्र में जिद से अपनी दुनिया बदल रहा है। बचपन में अक्षरों को छूकर पढ़ना-लिखना शुरू करने वाला यह युवा आज इंदौर महानगर के एक होस्टल में रहकर खुद के दम पर जीएसीसी गवर्नमेंट कॉलेज से बीए चौथे सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी कर रहा है। कॉलेज की रचनात्मक गतिविधियों में भी आगे है। अंगुलियों की पहचान से लेपटॉप पर अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी टाइपिंग करने वाले प्रवीण के पास अपना खुद का एंड्रॉइड मोबाइल है। जिससे वह फोन लगाने, रिसीव करने, कॉन्टेक्ट नंबर सेव करने आदि में हुनरमंद है। बचपन से भले ही मां-बाप का चेहरा ठीक से न देखा, लेकिन इन्हीं अब सपना है बैंक अधिकारी बनकर अपने मां-बाप की सेवा करने का।
चौंसला कुल्मी गांव के किसान का दृष्टिबाधित बेटा प्रवीण सामान्य छात्रों के साथ परीक्षा देकर प्रथम श्रेणी में पास की 10वीं-12वीं
लैपटाॅप पर हिंदी-इंग्लिश टाइपिंग भी फर्राटे में
प्रवीण को अाधुनिक तकनीक का ज्ञान भी स्वस्थ युवाओं से ज्यादा है। अपने मोबाइल में एक विशेष सॉफ्टवेयर डलवा रखा है जो पीडीएफ को छोड़ स्क्रीन पर दिखने वाले टेक्स्ट मैसेज पढ़ने में मदद करता है। प्रवीण इसकी सहायता से मोबाइल से अखबार पढ़कर, गूगल पर जानकारियां खोज अपडेट रहता है। लेपटॉप पर सिर्फ की-बोर्ड उपयोग करने वाले प्रवीण ने टाइपिंग में सिर्फ यही सीखा था कि किस अंगुली से अंग्रेजी-हिंदी का कौन सा अक्षर बनेगा। अब फर्राटेदार टाइपिंग कर लेता है। ब्रेल लिपि आज भी कंठस्थ है।
खिलौने संभाल नहीं पाया, तब पता चला
प्रवीण के पिता कृषक हरिनारायण बताते हैं जन्म से ही प्रवीण की दोनों आखों में रोशनी नहीं है। सात महीने का होने पर जब खिलौने देते तो वह संभाल नहीं पाता, तब यह पता चला। डेढ़ साल का होने पर अहमदाबाद के एक अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टर ने बताया दोनों आंखों की नसें ही नहीं होने से ऑपरेशन भी नहीं हो सकेगा। दो बेटियों के बीच इकलौता बेटा कभी देख नहीं पाएगा। बेटियां जब गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने जाती तो प्रवीण भी जिद करके साथ जाता और स्कूल में बैठता। इसी बीच रिश्तेदारों से पता चला अंधत्व से जूझते बच्चों के लिए इंदौर में हेलन केयर शिक्षा अकादमी चलती है। वहां जानकारी लेकर प्रवीण का दाखिला पहली कक्षा में कराया। बेटे की लगन ही है, जो आज इच्छाशक्ति से इंदौर में ही रहकर कॉलेज की पढ़ाई कर रहा है। उसकी पढ़ाई पूरी कराने कोई कसर नहीं छोड़ रहे।
10वीं में ब्रेल लिपि छूटी, हिम्मत न हारी
प्रवीण ने बताया ब्रेल लिपि में अक्षरों को छूकर समझने के साथ परीक्षा देकर नौवीं पास करने के बाद इंदौर में हासे स्कूल में 10वीं में प्रवेेश लिया। सामान्य विद्यार्थी पाठ्यक्रमाें के प्रश्नों से जुड़े उत्तरों का ऑडियो बनाकर देते। उससे तैयारी कर राइटर की सहायता से सामान्य बच्चों के साथ बैठ परीक्षाएं दीं। 10वीं में 61 व 12वीं में 78.9 प्रतिशत अंक मिले। अच्छा रिजल्ट आने पर सोचा, आगे भी पढ़ाई करना चाहिए।
फिंगर केरेक्टर सेंस की मदद - सूचना प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण अधिकारी (आईटीआई शाजापुर) मनीष गुलाटी का कहना है फिंगर केरेक्टर सेंस भी मदद कर रही- दृष्टि बाधित होकर भी प्रवीण लैपटाॅप पर कम समय में सीखकर हिंदी-अंग्रेजी में टाइप कर रहा है तो यह बड़ी बात है। इस काम में उसकी फिंगर केरेक्टर सेंस भी मदद कर रही है। शिक्षा के प्रति उसका लगाव व आईटी में तकनीकी ज्ञान उसकी एक्सट्रा सेंस के जरिए ही कारगर हो पा रही है।